Varanasi Cyber Crime: यूपी के वाराणसी में साइबर ठगी के बड़े मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने 116 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दो फीसदी कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर फर्म और बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद खातों की चेकबुक, पासबुक और एटीएम समेत अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर ठगी की रकम का लेनदेन करते थे। जांच में ऐसे 41 बैंक खातों से जुड़ी 143 शिकायतें सामने आई हैं।
एसीपी साइबर अपराध विनय द्विवेदी ने पुलिस लाइन में बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के रोहतास जिले के डिही (शिवसागर) निवासी नीतीश पांडेय का गिरोह का सरगना है। वह करौंदी स्थित विवेकानंदपुरम कॉलोनी की आदित्य रेजीडेंसी में रहता था। दुर्गाकुंड के कबीरनगर का दुष्यंत सिंह, सिगरा के शिवपुरवा निवासी हिमांशु झा और शिवाला का मोहम्मद रेहान गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं। वहीं, सामने घाट का प्रतीक तिवारी उर्फ बंटी और रोमिल वर्मा की तलाश की जा रही है।
एसीपी के मुताबिक शातिर अपराधियों का निशाना आर्थिक रूप से कमजोर लोग होते थे। उन्हें 2 फीसदी कमीशन का लालच देकर बैंक खाता खुलवाने के लिए संबंधित दस्तावेज मांगते थे। कहते थे कि व्यवसाय में जो लाभ होगा, उसमें से कमीशन देंगे। इस तरह ठग व्यावसायिक फर्म खोलते थे। फर्म संचालन के लिए चालू खाता खुलवाते थे, ताकि इसमें बड़ी धनराशि मंगाकर निकासी की जा सके। आरोपी खातों का पासबुक, चेकबुक, डेबिट और क्रेडिट कार्ड, सिम अपने पास रख लेते थे, ताकि लेन-देन की सभी जानकारी उनके पास ही रहे। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल निवेश के नाम पर साइबर ठगी, गेमिंग और बेटिंग ऐप में निवेश के लिए करते थे। वादे के मुताबिक कमीशन संबंधित लोगों को देते भी रहते थे।
आरोपियों के पास से एक एसयूवी, दो बुलेट, चार आई फोन, तीन एंड्रॉयड फोन, एक लैपटॉप, 19 चेकबुक, छह पासबुक, चार डेबिट कार्ड, दो क्रेडिट कार्ड, चार शॉपिंग कार्ड, एक ग्रीन रेमिट कार्ड, एक गेमिंग कार्ड, एक वोटर आईडी, एक डीएल, दो आरसी, 48 क्यूआर कोड स्कैनर बरामद किया गया है। एसयूवी और दोनों बुलेट नीतीश के नाम पर हैं। आरोपी रईसों की तरह जिंदगी जीते थे। फ्लैट में ऐशो आराम के कई महंगे सामान भी मिले हैं। आरोपी अपने महिला मित्रों पर खूब पैसे उड़ाते थे।
आरोपियों की ओर से खुलवाए गए 41 बैंक खातों से संबंधित 143 शिकायतें एनसीआरपी पोर्टल पर मिलीं थीं। पूर्व में की गईं शिकायतों के आधार पर ही आरोपियों में से एक के मोबाइल नंबर और संबंधित खाते के बारे में प्रतिबिंब पोर्टल के जरिए सूचना मिली। इसके बाद साइबर पुलिस और चेतगंज थाने की टीम ने काम शुरू किया। एसीपी ने बताया कि अकेले नीतीश पांडेय से जुड़े खातों से 80 शिकायतें और 78 लाख के लेन-देन के मामले पोर्टल पर दर्ज थे।
एसीपी ने बताया कि आरोपी लोगों को झांसा देकर एपीके फाइल भी डाउनलोड करा देते थे। एक्सई-पे एपीके फाइल के जरिये ये दूसरों के मोबाइल के मैसेंजिंग पर कंट्रोल कर लेते थे। लोगों के ओटीपी पढ़कर खातों में सेंधमारी करते थे। रुपये दूसरे अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!