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समस्तीपुर जिले के तीन प्रखंडों मोहनपुर, मोहिउद्दीननगर और विद्यापतिनगर के तटीय क्षेत्रों में गंगा और बाया नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि के कारण 56 से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर के दियारा इलाकों में स्थिति सबसे अधिक गंभीर है। बाढ़ का पानी कई गांवों में घरों की दहलीज पार कर चुका है। सड़कों पर दो से पांच फीट तक पानी बह रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने आवागमन के साथ-साथ पशुओं के लिए चारे और सुरक्षित ठिकाने की समस्या भी खड़ी हो गई है।
पांच दिनों में 2.35 मीटर बढ़ा गंगा का जलस्तर गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने हालात को और गंभीर कर दिया है। मोहनपुर के रसलपुर सरारी कैंप में गंगा का जलस्तर शनिवार को 48.60 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 45.50 मीटर है। पिछले पांच दिनों में नदी के जलस्तर में करीब 2.35 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
बाढ़ के पानी ने मोहिउद्दीननगर, मोहनपुर और विद्यापतिनगर के कई गांवों को मुख्य सड़क और प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाले रास्तों से लगभग काट दिया है। कई ग्रामीण इलाकों में अब पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है। नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन बन गई है। पानी जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
57 स्कूलों में पानी, पढ़ाई पर लगा ब्रेक बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर क्षेत्र के 57 स्कूलों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कई विद्यालयों के परिसर पूरी तरह जलमग्न हैं। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए प्रभावित स्कूलों में पढ़ाई बंद है। वहीं, दर्जनों परिवारों ने बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।
82 नावों का शुरू हुआ परिचालन, फिर भी कई गांवों में मुश्किल हुआ आवागमन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से अब तक 82 नावों का परिचालन शुरू किया गया है। प्रशासन नावों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ ही जरूरी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने बताया कि कई जगहों पर सड़कें पानी में डूब जाने से नाव ही एकमात्र सहारा रह गई है।
45 पंचायतों में 11,800 हेक्टेयर फसल पर संकट गंगा की बाढ़ का असर खेतों पर भी पड़ा है। जिले की 45 पंचायतों में करीब 11,800 हेक्टेयर फसल प्रभावित होने का अनुमान है। खेतों में कई दिनों से पानी जमा रहने के कारण धान समेत अन्य फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। किसानों की चिंता है कि यदि जलस्तर जल्द नहीं घटा तो बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका बढ़ जाएगी।
पशु चारा जुटाना सबसे बड़ी परेशानी बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चुनौती पशुपालकों के लिए चारा जुटाना है। खेत और चारा क्षेत्र पानी में डूबने के कारण पशुपालकों की परेशानी भी बढ़ गई है। कई परिवार अपने मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं। लेकिन चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और दवा उपलब्ध कराने की मांग की है।
पेयजल और भोजन की भी बढ़ी चिंता बाढ़ का पानी घरों और आसपास जमा होने के कारण प्रभावित परिवारों के सामने पीने के पानी, भोजन और दैनिक जरूरत के सामान की समस्या आने लगी है। कई परिवारों ने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर अस्थायी ठिकाना बना लिया है। प्रभावित लोगों का कहना है कि पानी बढ़ने की रफ्तार ऐसी ही रही तो आने वाले दिनों में मुश्किल और बढ़ सकती है। ये भी पढ़ें- बक्सर दुष्कर्म कांड: होटल के कमरे सील, शिक्षकों के मोबाइल से खुलेंगे राज; फरार आरोपी की तलाश में छापेमारी तेज
सड़क और बांध पर बनाया अस्थायी ठिकाना बाढ़ के पानी से घिरे गांवों और बस्तियों से लोगों का पलायन लगातार जारी है। पीड़ित परिवार ऊंचे और सुरक्षित इलाकों की तलाश कर रहे हैं। सैकड़ों परिवार बांध, स्कूल और सड़क किनारे अस्थायी आशियाना बनाकर रह रहे हैं।
उधर, लगातार बदल रही बाढ़ की स्थिति के बीच प्रशासन की निगाह जलस्तर पर टिकी है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ भोजन, पेयजल, पशु चारा और चिकित्सा जैसी जरूरी सुविधाएं उन गांवों तक पहुंचाना है, जहां सड़क संपर्क टूट चुका है।
समस्तीपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से पलायन करते लोग
समस्तीपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से पलायन करते लोग
समस्तीपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से पलायन करते लोग
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