बिहार में नदियों का जलस्तर घट रहा है, पर बाढ़ के कारण लाखों लोगों की जीवन रेखा टूट गई है। अब तक राज्य के 14 जिलों के 85 प्रखंडों में 533 ग्राम पंचायतों में लगभग 44 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।
भागलपुर के नवगछिया में बारिश और कोसी नदी के दबाव से गुरुवार की रात दो स्थानों पर तटबंध टूटे। रंगरा में पुरानी रेलवे लाइन का तटबंध लगभग 15 मीटर में ध्वस्त हो गया। नवगछिया के ही गोपालपुर में ब्रम्होत्तर बांध का 10 मीटर हिस्सा टूटकर बह गया, जिससे आधा दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा।
लोग घर छोड़कर पलायन कर रहे हैं, जबकि जल संसाधन विभाग तटबंधों की मरम्मत में जुटा हुआ है। बाढ़ के कारण प्रभात इलाकों में सड़कें खराब हो जाने के कारण ट्रक नहीं जा पा रहे हैं, जिससे इन इलाकों में राशन की किल्लत होने लगी है। बाढ़ ने सब्ज़ी की खेती को भी भारी नुकसान पहुँचाया है।
बाढ़ प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल शामिल हैं। सभी संबंधित अभियंताओं को सतर्क रहने को कहा गया है। राज्य में SDRF की 27 और NDRF की 10 टीमें विभिन्न जिलों में तैनात हैं।
बाढ़ ने न केवल लाखों लोगों को बेघर किया है, बल्कि राज्य की सप्लाई चेन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। नदियों के उफान और एनएच 80 व एनएच 31 पर पानी के कारण 2500 से अधिक भारी ट्रक फंसे हुए हैं। इन ट्रकों में चावल, दाल, चीनी और प्याज के करीब 50,000 मीट्रिक टन के पैकेट लोड हैं, जो नमी और गर्मी के कारण सड़ने के कगार पर हैं।
सड़कों पर आवागमन ठप होने से थोक बाजारों में रसद की आवक में 70 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस कमी का सीधा असर खुदरा बाजारों पर पड़ा है, जहां आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में 30% से 50% तक का उछाल आ चुका है। प्याज की कीमत ₹40 से ₹65 प्रति किलो, अरहर दाल ₹150 से ₹190, चीनी ₹5 से ₹8 प्रति किलो तक बढ़ी है। आलू और हरी सब्ज़ियों की कीमतें और भी बदतर हो गई हैं।
किसानों ने अपनी फसलों के बर्बाद होने से 10 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान झेला है। भागलपुर की सूजागंज और तिलकामांझी में बाढ़ के कारण रसद ठप होने से आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई हैं। मोकामा में 500 किसानों की 5,000 बीघे में लगी सब्ज़ियाँ बाढ़ में बर्बाद हो गईं।
शिवनार, बरहपुर, मोर, कन्हाईपुर, सुल्तानपुर, मेकरा के सब्ज़ी किसान भी परेशान हैं। शिवनार के सियाराम साव के 5 बीघा में खीरा, सेम, करेला, भिंडी और बोरा डूब गए। अमित कुमार की 7 बीघे में गोभी, खीरा, करेला, शिमला मिर्च, मूली की फसलें भी बर्बाद हो गईं। बरहपुर के देवेन्द्र महतो की पट्टे पर ली गई जमीन पर सारी फसलें डूब गईं।
70 वर्षीय वृद्ध किसान नाथुन महतो के 1 बीघे में टमाटर और बैंगन की फसल बाढ़ में बर्बाद हो गई, जिससे उन्हें 25‑30 हजार रुपये का कर्ज हो गया। बीडीओ से मुआवजे के लिए कई बार अनुरोध करने के बावजूद अभी तक कोई सहायता नहीं मिली है।
हल्दी छपड़ा के राहुल कुमार के 2 बीघे में धान की फसल भी डूबी, जिससे दियारे के 6 पंचायतों में लगभग 2,000 बीघे में धान, बाजरा, अड़हर, मक्का और सब्ज़ियों की खेती बर्बाद हो गई।
नीलकंठ टोला के धर्मनाथ राय, लालसाहेब राय, रतन टोला के समाचरन राय, ललन राय और सुदर्शन राय समेत डेढ़ सौ लोग महीनावां स्थित स्कूल में बने बाढ़ राहत शिविर में रह रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि अभी तक घरों में पानी जमा है, अनाज सड़ गया है, और घर में खाने के लिए अनाज तक नहीं बचा है।
बीईओ चंदन प्रियदर्शी ने बताया कि दियारे में 33 विद्यालय प्रभावित हुए हैं, जिनमें बच्चे पढ़ने नहीं आ रहे हैं। कुछ स्कूलों में अभी भी पानी जमा है।
पुनपुन में बाढ़ से जलमग्न छह पंचायतों की सैकड़ों बीघा धान की फसल डूबी थी। खेतों में पानी जमा होने से किसानों की पेशानी पर चिंता की लकीरें हैं। पुनपुन नदी में पांच दिनों के बाद जलस्तर घट रहा है, पर बरावां पंचायत के सपहुआ सहित आधा दर्जन गांव अभी भी पानी से घिरे हुए हैं। लोगों को गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल है; वे नाव के सहारे निकलने को मजबूर हैं।
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