अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल (ANMMCH) की इमरजेंसी में मरीजों की सुरक्षा और निजी एंबुलेंस से जुड़े लोगों की कथित सक्रियता को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। आरोप है कि जेपीएन अस्पताल से रेफर होकर ANMMCH की इमरजेंसी पहुंची एक महिला मरीज को कुछ लोग निजी अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रहे थे। 102 एंबुलेंस कर्मी अरुण कुमार ने इसका विरोध किया तो उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। घटना के बाद 102 एंबुलेंस कर्मियों में नाराजगी है। उन्होंने गया के एसएसपी सुशील कुमार से मिलने और मामले की शिकायत रखने की बात कही है। कर्मियों ने दोपहर से हड़ताल पर जाने की चेतावनी भी दी है।
जेपीएन अस्पताल से रेफर होकर मगध मेडिकल पहुंची थी महिला
जानकारी के मुताबिक, मुन्नी देवी को जेपीएन अस्पताल से 102 एंबुलेंस के जरिए अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। आरोप है कि मरीज के अस्पताल पहुंचने के बाद निजी एंबुलेंस से जुड़े कुछ लोग और कथित दलाल उसे दूसरे निजी अस्पताल ले जाने का प्रयास करने लगे। 102 एंबुलेंस कर्मी अरुण कुमार ने इसका विरोध किया। आरोप है कि इसी दौरान उनके साथ मारपीट की गई। घटना शनिवार तड़के की बताई जा रही है। मारपीट में घायल अरुण कुमार को भी इलाज के लिए मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सिर्फ मारपीट नहीं, अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल
घटना के बाद अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों के आसपास मौजूद रहने वाले अनधिकृत लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी तक ऐसे लोग कैसे पहुंचते हैं और उन्हें मरीजों से बातचीत करने या दूसरे अस्पताल ले जाने की कोशिश करने की अनुमति कैसे मिलती है। अगर कोई मरीज या उसका परिवार अपनी इच्छा से निजी अस्पताल में इलाज कराने का फैसला करता है तो यह अलग मामला है। लेकिन यदि किसी मरीज को प्रभावित करने, दबाव बनाने या किसी दूसरे तरीके से निजी अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
CCTV फुटेज से साफ हो सकता है पूरा घटनाक्रम
मामले में अस्पताल की CCTV फुटेज अहम साबित हो सकती है। मरीज के ANMMCH पहुंचने से लेकर उसके आसपास मौजूद लोगों, बातचीत और कथित मारपीट तक की गतिविधियां कैमरों में रिकॉर्ड हुई हों तो घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। जांच सिर्फ मारपीट की घटना तक सीमित रखने के बजाय इस पहलू को भी शामिल करने की मांग उठ रही है कि मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की कोशिश किसने की और अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों का वहां क्या काम था।
102 कर्मी एसएसपी से करेंगे शिकायत
घटना के बाद 102 एंबुलेंस कर्मियों में आक्रोश है। कर्मियों ने गया के एसएसपी सुशील कुमार से मुलाकात कर अपनी समस्या रखने की बात कही है। एसएसपी ने उन्हें दोपहर 12 बजे मिलने का समय दिया है। कर्मियों का कहना है कि यदि ड्यूटी के दौरान अस्पताल परिसर में ही उनके साथ मारपीट होती है तो उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। वे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
हड़ताल हुई तो मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी
102 एंबुलेंस कर्मियों ने दोपहर से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। अगर हड़ताल होती है तो इसका सीधा असर मरीजों की आवाजाही पर पड़ सकता है। गंभीर मरीजों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए 102 एंबुलेंस सेवा काफी महत्वपूर्ण है। इन दिनों पितृपक्ष मेले के कारण गया में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंच रहे हैं। ऐसे में अस्पतालों पर पहले से ही मरीजों का अतिरिक्त दबाव है। एंबुलेंस सेवा प्रभावित होने पर परेशानी और बढ़ सकती है।
प्रशासन के सामने कई अहम सवाल
घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों तक पहुंचने वाले निजी एंबुलेंस से जुड़े लोग और कथित दलाल कौन हैं। क्या अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस की गतिविधियों की नियमित निगरानी होती है? यदि कोई मरीज को निजी अस्पताल ले जाने का प्रयास करता है तो उसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? 102 एंबुलेंस कर्मी अरुण कुमार का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। CCTV फुटेज खंगाली जानी चाहिए और निजी एंबुलेंस से जुड़े लोगों के साथ कथित दलालों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाला हर व्यक्ति सबसे पहले मरीज है, ग्राहक नहीं। उसकी सुरक्षा और इलाज का भरोसा बनाए रखना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है।
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