नेपाल की प्रलयकारी बाढ़ में उत्तर प्रदेश के देवरिया के पति-पत्नी समेत 3 लोगों की मौत हो गई। वहीं गोरखपुर के रंगकर्मी और समाजसेवी रवि शंकर खरे के दामाद विवेक श्रीवास्तव लापता हैं। देवरिया जिले के लार उपनगर के रहने वाले जमील अपनी पत्नी के साथ नेपाल से बचकर घर आए हैं। उनका दावा है कि लार से 1890 में नेपाल में जाकर बसे एक परिवार के दंपती और उनका बेटा इस आपदा के शिकार हो गए।
लार उपनगर के मूल निवासी रहे जमील ने बताया कि बाढ़ की आहट लगते ही वे और उनकी पत्नी किसी तरह घर की छत पर चले गए। कुछ देर बाद कुछ लड़कों ने दोनों को सुरक्षित वहां से निकाल कर बाइक से केवरनी गांव पहुंचा दिया। वहां तीन दिन रहने के बाद सेना के हेलीकॉप्टर से बटार पहुंचे। इस घटना की जानकारी होने के बाद एक शुभचिंतक ने हवाई जहाज का टिकट उपलब्ध कराया और वहां से जमीन और उनकी पत्नी भारत पहुंचीं। उन्होंने यह भी बताया कि कभी देवरिया के लार के ही मूल निवासी रहे मुख्तार अहमद, उनकी पत्नी और उनका लड़का साहिल इस आपदा की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई। उनके परिवार का और कोई सदस्य अब लार में नहीं रहता, सभी लोग कानपुर में रहते हैं।
दो दिन पहले मोहम्मद जमील अहमद जब लार पहुंचे तो देखे की उनके पुराने मकान की हालत जर्जर हो चुकी है । इस समय वह उसके बगल में स्थित अपने बेटी और दामाद नसीम के घर पर रह रहे हैं। इनका एकलौता बेटा भी है जो कुछ दिन पहले नेपाल से अपनी बहन के घर आ गया था। लार के रहने वाले सभी लोग नेपाल में तरह-तरह के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। मोहम्मद जमील का कहना है कि उनके पूर्वज 1890 में भारत से नेपाल गए थे और वहां अपना व्यवसाय शुरू किया। नेपाल के तिरसूली कजार स्थित बाजार में इन लोगों ने अपना व्यवसाय करना शुरू किया था। उन्होंने यह भी बताया कि पहले आने-जाने के संसाधन नहीं थे, तो उनके पूर्वज 72 किलोमीटर दूर काठमांडू माल लाने के लिए पैदल आते-जाते थे। इनके बड़े भाई मोहम्मद जफर अभी भी नेपाल में ही है और सुरक्षित स्थान पर हैं।
वहीं, नेपाल की तबाही में गोरखपुर के रंगकर्मी और समाजसेवी रवि शंकर खरे के दामाद विवेक श्रीवास्तव का भी अब तक कोई पता नहीं चल सका है। विवेक सेवा भारती इंटरनेशनल के 10 सदस्यीय दल के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे। रंगकर्मी, समाजसेवी रवि शंकर खरे महानगर के पहले नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मी शंकर खरे के बेटे हैं। उनके दामाद विवेक श्रीवास्तव मूल रूप से रांची के रहने वाले हैं। वह अब अमेरिकी नागरिक हैं। वर्ष 2002 में विवेक की शादी रवि शंकर खरे की बेटी गरिमा से हुई थी।
रविशंकर खरे ने बताया कि 26 अगस्त की सुबह विवेक ने अपनी मां से रांची फोन पर बात की थी। इसके कुछ समय बाद वे अपने साथियों के साथ नेपाल के रुसुआगढ़ पहुंचे थे। यही चीन में प्रवेश का अंतिम पड़ाव है। यहां वीजा काउंटर पर विवेक के पासपोर्ट की सुबह 8.30 बजे की एंट्री दर्ज है। इसके 15 मिनट बाद ही रूसुआगढ़ को बोटेकोसी नदी से आए सैलाब ने लील लिया। जिस दल के साथ वे यात्रा पर निकले थे, उसमें नौ अमेरिका और एक कनाडा के नागरिक शामिल थे। बताया गया कि विवेक श्रीवास्तव सांस्कृतिक प्रकोष्ठ सेवा भारती की अंतरराष्ट्रीय शाखा से जुड़े थे। वे सेवा भारती इंटरनेशनल के साथ मिलकर अमेरिका और पश्चिमी देशों में भारतीय संस्कृति की पहचान को मजबूत करने के काम में भी सक्रिय थे।
हादसे की सूचना मिलने के बाद परिवार में चिंता का माहौल है। रवि शंकर खरे अपने बड़े बेटे गौरव के पास दिल्ली रवाना हो गए हैं। परिजन अमेरिकी दूतावास से भी संपर्क में हैं। विवेक की तलाश के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
रवि शंकर खरे के पारिवारिक मित्र और शहर के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. बीबी त्रिपाठी ने बताया कि इस सूचना से पूरा परिवारीजन और शुभचिंतक दुखी है। उन्होंने कहा कि अभी तक विवेक श्रीवास्तव का कोई सुराग नहीं मिला है। लेकिन परिवार के सदस्य अब भी उनके सकुशल लौटने की उम्मीद लगाए हुए हैं। सभी शुभचिंतक उनकी सुरक्षित वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।
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