पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) समेत 11 कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव के लिए सोमवार को मतदान है. वोटिंग के बाद शाम को नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे. इस बार पीयू का चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय होने के कारण रोचक बन गया है. ऐसे में सभी की निगाहें लगी हुई हैं कि इस बार पीयू छात्रसंघ पर किस पार्टी के छात्र संगठन का कब्जा होगा.
चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी का छात्रसंघ चुनाव इस बार सिर्फ यूनिवर्सिटी तक सीमित न रहकर एक बड़े राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो चुका है. 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहे इस चुनाव को मुख्यधारा की राजनीति का 'सेमीफाइनल' माना जा रहा है.
पंजाब विधानसभा के चुनावी तपिश के चलते सियासी दलों ने छात्रसंघ चुनाव को अपनी साख का सवाल मानकर मैदान में उतरी हैं. बीजेपी और अकाली दल के छात्र संगठनों ने वोटिंग से ठीक पहले छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए आपस में हाथ मिला लिया है तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन ने पूरी ताकत झोंक रखी है. अब देखना है कि किसके सिर जीत का सेहरा सजता है?
पीयू के छात्रसंघ का सियासी समीकरण
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ के चुनावी रण में कुल 16 प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं. अध्यक्ष पद के लिए चार, उपाध्यक्ष के लिए पांच, सचिव पद के लिए तीन और संयुक्त सचिव के लिए चार पदों पर उम्मीदवार मैदान में है. इनमें कुल चार महिला उम्मीदवार हैं, जिसमें से उपाध्यक्ष पद के लिए दो और सचिव और संयुक्त सचिव के लिए एक-एक प्रत्याशी.
पीयू के अध्यक्ष पद के लिए एनएसयूआई से गुरमन सिंह सिद्धू, AAP के एएसएपी से आदिल बराड़, एबीवीपी से अंकित बिढान और के छात्र संगठन सथ से दर्शनप्रीत सिंह से किस्मत आमा रहे हैं. इस बार के चुनाव में किसी भी संगठन ने चारों पदों पर अपने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं.
छात्रसंघ के लिए कुल 16,468 स्टूडेंट मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे. पीयू प्रशासन के अनुसार मतदान को लेकर 60 विभागों में 191 बूथ पर 9,000 लड़कियां और 7,467 लड़के मतदान करेंगे. 10 दिनों तक तक चले चुनाव प्रचार के बाद अब वोटिंग की बारी है.
त्रिकोणीय मुकाबला और सियासी समीकरण
यूनिवर्सिटी के चुनावी दंगल में मुकाबला बेहद दिलचस्प और पेचीदा हो गया है. राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों की छात्र इकाई इस चुनाव को अपनी साख का सवाल मानकर मैदान में उतरी हैं, राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई CYSS (अब ASAP) अपनी सरकार की नीतियों, रोजगार के वादों और विकास के नैरेटिव के दम पर युवाओं के बीच पैठ बना रही है.
कांग्रेस समर्थित NSUI मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी पुरानी ज़मीन वापस हासिल करने और राज्य सरकार के खिलाफ असंतोष को भुनाने की पूरी कोशिश में जुटी है. वहीं, हालिया चुनावों में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाली ABVP और SOI अपनी मजबूत सांगठनिक क्षमता और छात्र-मुद्दों को उठाकर मुकाबले को पूरी तरह त्रिकोणीय बना रहे हैं.
तदान से ठीक एक दिन पहले ABVP और SOI के बीच हुए समझौते से कैंपस में वोटों के समीकरण और वोट जुटाने की प्रक्रिया पर असर पड़ने की उम्मीद है. SOI की ओर से ABVP उम्मीदवारों को समर्थन और अपने समर्थकों को उनके पक्ष में जुटाने का फैसला चुनावी गणित के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मतदान से पहले हुए इस गठजोड़ ने कैंपस के चुनावी माहौल में एक नया समीकरण बना दिया है.
2027 का 'सेमीफाइनल' क्यों कहा जा रहा है?
पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रदेश के सभी 23 जिलों के युवा पढ़ाई करते हैं. कैंपस का चुनावी माहौल यह साफ संकेत देता है कि पंजाब का पढ़ा-लिखा और जागरूक युवा वर्ग किस राजनीतिक विचारधारा की तरफ झुक रहा है. इसीलिए सभी राजनीतिक दलों ने पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के जरिए अपना दबदबा कायम करने की है.
राज्य की मुख्य राजनीतिक पार्टियां इस चुनाव के जरिए अपनी नीतियों और युवा लोकलुभावन योजनाओं की जमीनी हकीकत को परख रही हैं. यहां से निकलने वाले युवा नेता 2027 के विधानसभा चुनाव में ग्राउंड कैंपेन का चेहरा बनेंगे.
इस बार का मुकाबला किसी एक तरफ झुकता नजर नहीं आ रहा है, हॉस्टल की बुनियादी सुविधाएं, फीस वृद्धि, रिसर्च स्कॉलर्स के मुद्दे और सुरक्षा जैसे लोकल टॉपिक राष्ट्रीय मुद्दों पर भारी पड़ रहे हैं. निर्दलीय प्रत्याशियों और बागी गुटों की मौजूदगी ने बड़े दलों का गणित उलझा दिया है. छात्रसंघ का ताज किसके सिर सजेगा, फैसला छात्र करेंगे, लेकिन यह तय है कि PU चुनाव का परिणाम 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पंजाब की राजनीति का मिजाज जरूर तय कर देगा.
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