गया जी धाम में 25 सितंबर से शुरू होने वाले पितृपक्ष मेला-2026 को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन इस बार तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच बच्चों के गुम होने की आशंका को देखते हुए पहली बार क्यूआर आधारित सुरक्षा बैंड की व्यवस्था की जा रही है। यह बैंड बच्चों के हाथों में लगाया जाएगा और उनके परिजनों के मोबाइल नंबर से जुड़ा रहेगा। बच्चा भीड़ में परिवार से अलग होता है तो उसके परिजनों को तुरंत सूचना मिल सकेगी। प्रशासन का मानना है कि इससे बच्चों को तलाशने में लगने वाला समय कम होगा और परिवारों की परेशानी भी घटेगी।
भीड़ में बच्चों की सुरक्षा होगी आसान
पितृपक्ष मेला के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपने पितरों का पिंडदान करने गया जी पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में परिवार छोटे बच्चों के साथ भी यहां आते हैं। ऐसे में भीड़ के बीच बच्चों के बिछड़ने की घटनाएं हर साल सामने आती रही हैं। इसी चुनौती को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस बार आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है।
श्रद्धालुओं ने सुरक्षा बैंड की पहल को सराहा
राजस्थान से गया जी पिंडदान करने पहुंचे आदित्य गुप्ता ने बताया कि वह अपनी दादी और मां का पिंडदान करने आए हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से बच्चों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बैंड की व्यवस्था बेहद सराहनीय है। भीड़ में यदि कोई बच्चा अपने परिजनों से बिछड़ जाता है तो उसे ढूंढना काफी आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों की सुरक्षा और बेहतर होगी।
व्यवस्था में सुधार, लेकिन सफाई और सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत
कोटा के रहने वाले और नौकरी के कारण मुंबई में रहने वाले शरद गुप्ता ने बताया कि वह अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए गया जी पिंडदान करने आए हैं। उन्होंने कहा कि मेला क्षेत्र की व्यवस्था पहले की तुलना में काफी बेहतर दिखाई दे रही है। उनके पिता पहले भी यहां आए थे और उन्होंने उस समय व्यवस्थाओं को लेकर शिकायत की थी, लेकिन इस बार उन्हें काफी सुधार नजर आ रहा है।
पूर्वजों के लिए पिंडदान करने पहुंचे श्रद्धालु
प्रज्ञान गुप्ता ने बताया कि वह मुंबई से अपने माता-पिता के साथ गया जी आए हैं। वह अपने दादाजी की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपरा का निर्वहन करने का उन्हें सौभाग्य मिला है।
क्यूआर बैंड से जुड़े रहेंगे परिजन
डीएम शशांक शुभंकर ने बताया कि पितृपक्ष मेला में आने वाले बच्चों के हाथों में बारकोड यानी क्यूआर आधारित सुरक्षा बैंड लगाया जाएगा। यह बैंड उनके अभिभावकों के मोबाइल नंबर से लिंक रहेगा। अगर कोई बच्चा भीड़ में अपने परिवार से अलग हो जाता है तो परिजनों को तुरंत मोबाइल पर सूचना मिल जाएगी। इससे बच्चे का पता लगाने में लगने वाला समय काफी कम होगा और परिजनों की चिंता भी घटेगी।
पिछले साल के अनुभव से लिया सबक
डीएम ने बताया कि पिछले वर्ष पितृपक्ष मेला के दौरान कई बच्चे अपने परिजनों से बिछड़ गए थे। प्रशासन और स्वयंसेवकों की मदद से सभी बच्चों को सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचा दिया गया था, लेकिन इस प्रक्रिया में समय लगा और परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा रही है, ताकि ऐसी स्थिति बनने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
सफाई और तकनीक पर विशेष जोर
डीएम शशांक शुभंकर ने बताया कि पितृपक्ष मेला-2026 में साफ-सफाई प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। पूरे मेला क्षेत्र को अलग-अलग जोन में बांटकर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही मेला की वेबसाइट को भी पहले की तुलना में ज्यादा उपयोगी और आधुनिक बनाया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को जरूरी जानकारी आसानी से मिल सके। प्रशासन का उद्देश्य इस बार पितृपक्ष मेला को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीक-सक्षम बनाना है, ताकि गया जी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!