राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक के तीसरे दिन राम मंदिर निर्माण कार्य को लेकर समिति चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने बातचीत में प्रगति की जानकारी। उन्होंने कहा अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनना करोड़ों श्रद्धालुओं के सपने का साकार होना है। बताया कि मंदिर निर्माण में केंद्र या राज्य सरकार का पैसा नहीं लगा बल्कि ट्रस्ट द्वारा एकत्रित धन से निर्माण कराया गया। समिति चेयरमैन ने बताया कि तय किए गए करीब 70 निर्माण कार्यों में से लगभग 60 कार्य पूरे हो चुके हैं। विभिन्न एजेंसियों के द्वारा पूरे हो चुके निर्माण कार्यों को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया गया है जिसका रखरखाव अब ट्रस्ट द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परिसर में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या दूर करने के लिए सीवेज और ड्रेनेज व्यवस्था को मुख्य नाले से जोड़ने का काम किया जाएगा।
निर्माण चेयरमैन मिश्रा के मुताबिक संग्रहालय, ऑडिटोरियम और ट्रस्ट कार्यालय के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बताया गया कि संग्रहालय की गैलरी नंबर- सात पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यहां प्रवेश शुल्क लगाया जाएगा या नहीं, इसका फैसला ट्रस्ट करेगा। उन्होंने चंपत राय के पत्र में अपना नाम होने के सवाल पर कहा कि पत्र को हमने नहीं देखा है। फिलहाल विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। राम मंदिर के CEO की नियुक्ति के साक्षात्कार के सवाल पर मिश्रा ने कहा कि वह इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं और उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। राम मंदिर के निर्माण कार्यों की समीक्षा का शुक्रवार को अंतिम दिन है। इस दौरान बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव जगदीश आफले, सीबीआरआई के पूर्व चेयरमैन एके मित्तल और यश मित्तल समेत एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।
आपको बता दें इससे पहले राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में अब तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने 9 पन्नों का एक बयान जारी किया है। इस बयान में चंपत राय ने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस नृपेंद्र मिश्रा को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। चंपत राय ने 9 पन्नों के इस बयान में चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े कई अहम फैसले लिए। ये फैसले नृपेंद्र मिश्रा ने लेते हुए किसी अन्य के फैसले को महत्व नहीं दिया। मंदिर निर्माण के फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा के प्रमुख रहने का दावा किया गया है।
चंपत राय का दावा है कि नृपेन्द्र मिश्रा ने अपनी सहूलियत के लिए राम मंदिर निर्माण समिति में अपने से जुड़े अहम लोगों को जोड़ा। दावे के अनुसार इनमें से कुछ को 6 सालों में एक या दो बार ही अयोध्या बुलाया गया। वहीं, इनमें से अनूप मित्तल (पूर्व चेयरमेन एनबीसीसी) सदैव नृपेन्द्र के साथ मंदिर निर्माण समिति की बैठक में आते थे। यह बैठक प्रतिमास होती थी, कुछ काल तक 15 दिन में एक बार हुई, प्रत्येक निर्णय इसी समिति में होता था।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!