मेरठ में पुलिस कार्यालय के अंदर और एसओजी कार्यालय में अवैध हिरासत में रखकर किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को थर्ड डिग्री देने वाले इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को एसएसपी ने सस्पेंड कर दिया है। दो दिन पहले ही अखिलेश गौड़ समेत आठ पुलिसकर्मियों को इसी मामले में लाइन हाजिर किया गया था। पुलिस पर लगातार कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा था। इस पूरे मामले में डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह जांच कर रहे हैं अभी उनकी जांच रिपोर्ट आना बाकी है। माना जा रहा है कि आगे चलकर दोषी मिलने पर पुलिसकर्मियों पर मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।
मेरठ पुलिस कार्यालय पर 19 अगस्त को भाकियू बीआर अंबेडकर के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय भाटी और मेरठ जिलाध्यक्ष मोहित जाटव पूर्व एसएसपी अविनाश पांडेय से मिलने पहुंचे थे। दोनों ने आरोप लगाया कि पूर्व एसएसपी अविनाश पांडेय ने उन्हें कार्यालय के अंदर वाले कमरे में बंधक बनाकर पीटा। आरोप है कि इसके बाद एसएसपी ने सिविल लाइन थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को बुला लिया और थर्ड डिग्री दिलाई।
आरोप है कि पुलिस ऑफिस में करीब एक घंटे तक बंधक बनाकर पिटाई करने के बाद दोनों के मुंह पर कपड़ा बांधकर एसओजी कार्यालय ले जाया गया। यहां पर फट्टे से पीटा गया और खलनायक फिल्म के गाने पर डांस कराया गया इसके बाद रस्सी से पैर बांधकर उल्टा लटका दिया। दिग्विजय और मोहित ने आरोप लगाया कि उन्हें थर्ड डिग्री दी गई और एनकाउंटर की धमकी दी गई। करीब 10 घंटे तक अवैध हिरासत में रखकर पिटाई करने के बाद विधायक अतुल प्रधान के हस्तक्षेप के बाद देररात छोड़ा गया। इसी मामले में वेस्ट यूपी के तीन मंत्रियों और दो विधायकों ने शासन और सरकार में शिकायत की थी।
माना जा रहा है कि इसी प्रकरण में आईपीएस अविनाश पांडेय को साइड लाइन कर दिया गया और मेरठ में बीबीजीटीएस मूर्ति को बतौर एसएसपी बनाकर भेजा गया। वहीं, दूसरी ओर एडीजी भानु भास्कर ने पूरे प्रकरण में जांच सहारनपुर रेंज के डीआईजी अभिषेक सिंह को दे दी। अभिषेक सिंह ने पुलिस कार्यालय और एसओजी कार्यालय पर जांच भी की है। घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद सभी पुलिसकर्मियों और आरोपी पुलिसकर्मियों के बयान भी लिए हैं। आरोपी पुलिसकर्मियों की पहचान भी पीड़ित दिग्विजय भाटी और मोहित से कराई गई। सर्किट हाउस में दिग्विजय भाटी और मोहित के बयान भी लिए गए थे।
एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने चार्ज लेने के साथ ही इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ समेत आरोपी आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया था। हालांकि पीड़ित पक्ष और सपा नेताओं ने कहा था कि लाइन हाजिर करना कोई कार्रवाई नहीं है। अब जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, उसके साथ ही दोषी पुलिसकर्मियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। रविवार को एसएसपी ने इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को सस्पेंड कर दिया है। माना जा रहा है कि जांच में दोषी मिलने पर इन पर मुकदमा भी दर्ज हो सकता है और इंस्पेक्टर समेत बाकी पुलिसकर्मियों को जोन से बाहर पूर्वांचल में कहीं ट्रांसफर किया जा सकता है।
वहीं इस मामले में एसपी सिटी मेरठ विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही-उदासीनता बरतने और स्वेच्छाचारिता बरतने के कारण इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को एसएसपी ने सस्पेंड कर दिया है। इस मामले में बाकी जांच अन्य अधिकारियों के स्तर पर प्रचलित है।
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