अमेरिका और ईरान के बीच करीब छह महीने से जारी संघर्ष के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताने और इतिहास के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने के ऐलान के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया है. ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने जमीन, समुद्र, हवा, वायु रक्षा और साइबर स्पेस में तैयार रहते हुए अमेरिका के नए खतरों का कड़ा जवाब देने की घोषणा की है. ये नया विवाद रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होने और वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतों के बीच बढ़ा है. ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने स्पष्ट किया है कि तेहरान कई मोर्चों पर एक साथ अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि जमीन, समुद्र, हवा, वायु रक्षा और साइबर स्पेस में मुस्तैद रहकर ईरानी सेना दुश्मन के नए खतरों का कुचलने वाला और दर्दनाक जवाब देगी. हालांकि, 6 महीने लंबे संघर्ष में ईरान की अर्थव्यवस्था और पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है, लेकिन उसके पास अब भी मिसाइल और ड्रोन क्षमताएं मौजूद हैं.
होर्मुज पर है हमारा पूरा कंट्रोल: ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज को लेकर बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि वो इस वक्त होर्मुज को एक अमेरिकी क्षेत्र के रूप में देखते हैं. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि होर्मुज और उससे जुड़े जमीनी इलाकों समेत उस पूरे क्षेत्र पर उनका पूरा कंट्रोल है. ट्रंप के अनुसार, ईरान कोई भी समझौता करना चाहता है, लेकिन वह अभी उनके मुताबिक सही समझौता करने के लिए तैयार नहीं है.
ईरान के पास नहीं हो सकता परमाणु हथियार
दक्षिण कैरोलिना के मर्टल बीच में एक रैली के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर ईरान को परमाणु हथियार मिल गया तो इसके बहुत बुरे परिणाम सामने आएंगे. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने आगे बढ़कर ईरान के परमाणु प्रयासों को रोका है और तेहरान के पास कभी-भी परमाणु हथियार नहीं होंगे.
ईरान पर चौतरफा दबाव अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की है कि वह सोमवार को ईरान के खिलाफ नए और कड़े वित्तीय प्रतिबंधों का विस्तृत ब्योरा जारी करेंगे. बेसेंट ने इस रणनीति को चौतरफा दबाव बताते हुए कहा कि उनके पास पहले से नाकेबंदी है और अब वो इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस आर्थिक अभियान का मकसद ईरान के मौजूदा नेतृत्व और शासन को गिराना है. ट्रंप ने अन्य देशों को भी चेतावनी दी है कि ईरान को आर्थिक मदद देने पर परिणाम भुगतने होंगे.
दबाव कभी-भी समस्या का समाधान नहीं: चीन
चीन जो समुद्र के रास्ते ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, उसने प्रतिबंधों के इस अमेरिकी दृष्टिकोण को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है. वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने आधिकारिक बयान में कहा कि प्रतिबंध और अत्यधिक दबाव कभी भी समस्या का समाधान नहीं करते. चीन ने विवाद सुलझाने के लिए कूटनीति का रास्ता अपनाने का आह्वान किया है. आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में ईरान के कुल समुद्री तेल निर्यात का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले चीन को गया था.
प्रतिबंध से निपटने के लिए बनाना होगा प्लान ईरान संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालीबाफ ने अमेरिका की धमकियों से निपटने के लिए अपने संकल्प दोहराने के साथ अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे भारी दबाव को स्वीकार किया है. पड़ोसी देश इराक में उन्होंने कहा कि अन्यायपूर्ण प्रतिबंधों से पार पाने के लिए योजनाएं बनानी होंगी. गालीबाफ ने आगाह किया कि केवल सैन्य ताकत से देश नहीं चल सकता. यदि लोग भूखे हों, वित्तीय टर्नओवर, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय उत्पादन न हो तो देश का जीवित रहना संभव नहीं है.
तेल की कीमतों में उछाल
अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों की धमकी के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया. ब्रेंट क्रूड 94.39 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 87.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. युद्ध से पहले दुनिया के कुल तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता था. अब यहां जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है और गुरुवार को केवल सात मालवाहक जहाजों का गुजरना दर्ज किया गया.
टोल वसूलने का विरोध स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए सामान्य नौवहन बहाल करने के लिए ईरान और ओमान के बीच अलग से बातचीत हुई है. हालांकि, अमेरिका ने जहाजों पर किसी भी प्रकार का टोल या टैक्स लगाने का विरोध किया है. वहीं, नाटो के शीर्ष कमांडर अमेरिकी वायु सेना जनरल एलेक्सस ग्रिनकेविच ने सहयोगी देशों के रक्षा प्रमुखों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस कर होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता पर चर्चा की. प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ये नाटो मिशन नहीं है, लेकिन नौवहन सुरक्षा में समन्वय के लिए नाटो क्षमताएं उपयोगी हैं.
ट्रंप की लोकप्रियता पर असर आपको बता दें कि छह महीने लंबे संघर्ष ने ईरान को गंभीर नुकसान पहुंचाया है, लेकिन ट्रंप अपने घोषित लक्ष्यों को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाए हैं. इस संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे अमेरिका में ट्रंप की लोकप्रियता पर भी असर पड़ा है. एक ताजा सर्वेक्षण में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग उनके मौजूदा कार्यकाल के सबसे निचले स्तर पर दर्ज की गई है. अप्रैल और जून में दो बार युद्धविराम के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल सका है.
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