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अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि लोग फ़ायरिंग स्क्वॉड से पूर्व अमेरिकी मेजर को दी जाने वाली मौत की सज़ा का लाइव प्रसारण देख सकेंगे.
रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि 2009 में फ़ोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर 13 निहत्थे अमेरिकी सैनिकों की गोली मारकर हत्या करने वाले निदाल हसन को दी जाने वाली मौत की सज़ा का लाइव प्रसारण किया जाएगा.
माना जा रहा है कि अमेरिका में क़रीब एक सदी में पहली बार किसी को सार्वजनिक रूप से मौत की सज़ा दिए जाने का प्रसारण होगा.
मौत की सज़ा पाए क़ैदियों के साथ काम करने वाले वकील जॉन मिल्स ने कहा कि इसका लाइव प्रसारण करना "आधुनिक दौर में अभूतपूर्व" है और इसकी क़ानूनी स्थिति भी स्पष्ट नहीं है.
हेगसेथ ने कहा, "लोगों को समझना होगा कि इस तरह के कामों के गंभीर नतीजे होते हैं."
डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर क्रिस मर्फ़ी ने सीएनएन से कहा कि मौत की सज़ा का लाइव प्रसारण करना "घिनौना" है और इससे इस्लामिक स्टेट के तरीक़ों की याद आती है.
पेंटागन ने इस हफ़्ते की शुरुआत में एलान किया था कि हसन को मौत की सज़ा दी जाएगी. 60 साल से ज़्यादा वक़्त में ये पहला मौक़ा है जब किसी अमेरिकी सैनिक को मौत की सज़ा दी जा रही है.
वर्जीनिया के रहने वाले अमेरिकी सेना के मनोचिकित्सक हसन ने फ़ोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर एक भीड़भाड़ वाली मेडिकल बिल्डिंग में 13 निहत्थे सैनिकों को गोली मारकर हत्या करने की बात स्वीकार की थी.
इस हमले में सात गोलियां लगने से घायल हुए अमेरिकी सेना के पूर्व सार्जेंट अलोंज़ो लंसफ़र्ड ने बीबीसी के टुडे कार्यक्रम में कहा कि वह फ़ायरिंग स्क्वॉड से हसन को मौत की सज़ा दिए जाने के समर्थन में हैं. उनके मुताबिक़, हसन ने जो किया, उसके लिए यही तरीक़ा "उचित" है.
लंसफ़र्ड नहीं चाहते कि हर कोई इस लाइव प्रसारण को देखे. उन्हें चिंता है कि इससे कम उम्र के लोगों पर क्या असर पड़ेगा. लेकिन उनका कहना है कि गोलीबारी से प्रभावित लोगों को इसे देखने का मौक़ा मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा, "मारे गए सैनिकों के परिवारों, हमले में बचने वालों के परिवारों और ख़ुद बचने वाले लोगों को इसे बिना किसी सेंसरशिप के देखने का मौक़ा मिलना चाहिए."
लंसफ़र्ड ने कहा कि वह हसन को दी जाने वाली मौत की सज़ा के वक़्त वहां मौजूद रहने की योजना बना रहे हैं. गोली चलने से ठीक पहले वह चाहते हैं कि हसन उनकी आंखों में देखे.
उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि उसे पता चले कि वह नाकाम रहा. मैं आज भी ज़िंदा हूं."
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हेगसेथ ने रूढ़िवादी टीवी चैनल रियल अमेरिका'ज़ वॉइस को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि हसन को सैनिकों की फ़ायरिंग स्क्वॉड के ज़रिए मौत की सज़ा दी जाएगी. उन्होंने कहा, "ऐसा ही होना चाहिए."
यह पूछे जाने पर कि क्या हसन ने अपनी कोई आख़िरी इच्छा जताई है या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया है, हेगसेथ ने कहा, "मुझे इससे कोई मतलब नहीं. हम उनसे 3 दिसंबर को मिलेंगे."
पेंटागन के एक प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि ट्रंप ने रक्षा मंत्री की सिफ़ारिश को मंज़ूरी दे दी है. बीबीसी ने व्हाइट हाउस से पूछा है कि क्या ट्रंप सार्वजनिक रूप से मौत की सज़ा दिए जाने के लाइव प्रसारण का समर्थन करते हैं.
पिछले साल 17 देशों में कुल 2,700 से ज़्यादा लोगों को मौत की सज़ा दी गई. हालांकि, इनमें से सिर्फ़ दो देशों में सार्वजनिक रूप से मौत की सज़ा दी गई.
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एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक़, 2025 में ईरान में 11 लोगों को सार्वजनिक रूप से मौत की सज़ा दी गई थी. वहीं, अफ़ग़ानिस्तान में ऐसे छह मामले सामने आए थे.
हसन को 3 दिसंबर को टेक्सस के फ़ोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर मौत की सज़ा दी जानी है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी सैन्यकर्मी को फ़ायरिंग स्क्वॉड के ज़रिए मौत की सज़ा दी जाएगी.
अदालत में हसन ने "किसी भी ग़लती" के लिए माफ़ी मांगी थी. 2013 में सैन्य अदालत में सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें लगता था कि वह अफ़ग़ानिस्तान में मुसलमानों और तालिबान की रक्षा कर रहे थे.
अमेरिकी सैन्य क़ानून के मुताबिक़, किसी सैन्यकर्मी को मौत की सज़ा देने के लिए राष्ट्रपति की मंज़ूरी ज़रूरी है. इसके अलावा, ऊपरी अदालत में फ़ैसले की समीक्षा और सज़ा की क़ानूनी वैधता पर अंतिम फ़ैसला भी ज़रूरी है.
वकील जॉन मिल्स ने कहा कि हसन के मामले में अपील की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है. हसन संघीय अदालत में अपनी सज़ा और दोषसिद्धि को चुनौती दे सकते हैं. ऐसा होने पर मौत की सज़ा पर रोक लगने की संभावना है.
मिल्स ने कहा कि ऐसे में उन्हें हैरानी होगी अगर हसन को तय तारीख़ पर मौत की सज़ा दी जाती है.
उन्होंने आगे कहा, "फ़ायरिंग स्क्वॉड से दी जाने वाली मौत की सज़ा का लाइव प्रसारण कराने की कोशिश ट्रंप प्रशासन का महज़ ध्यान खींचने का एक तरीक़ा है. ऐसा होने की संभावना भी कम है और इससे न्याय होने की बात तो और भी दूर है."
अमेरिका के कुछ राज्यों में मौत की सज़ा दिए जाने के वक़्त लोगों की मौजूदगी ज़रूरी होती है. कई राज्यों में पत्रकारों का मौजूद रहना अनिवार्य है और मौत की सज़ा पाने वाला व्यक्ति कुछ लोगों को बुला सकता है. कुछ राज्यों में आम नागरिक भी गवाह बनने के लिए अपना नाम दे सकते हैं.
लेकिन अमेरिका में मौत की सज़ा का लाइव प्रसारण पहले कभी नहीं हुआ है. अमेरिका में मौत की सज़ा देने के तरीक़ों पर रिसर्च करने वाली फ़ोर्डहम यूनिवर्सिटी की क़ानून की प्रोफ़ेसर डेबोरा डेनो कहती हैं कि ऐसा पहली बार होगा.
उनके मुताबिक़, मौत की सज़ा का लाइव प्रसारण "इस देश में पारदर्शिता का ऐसा स्तर सामने लाएगा, जो हमने शायद पहले कभी नहीं देखा."
वह कहती हैं, "आधे से ज़्यादा अमेरिकी मौत की सज़ा का समर्थन करते हैं, हालांकि अब यह समर्थन घट रहा है. ऐसे में यह तर्क दिया जा सकता है कि अगर आप मौत की सज़ा चाहते हैं, तो हम आपको दिखाएंगे कि देश में इसे कैसे दिया जाता है. तब लोगों को समझ आएगा कि असल में क्या होता है, जिसे बहुत से लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं."
डेनो के मुताबिक़, लाइव प्रसारण को लेकर कुछ अहम सवाल भी हैं. मसलन, क्या इसे देखने के लिए उम्र की पाबंदी होगी और क्या जिस ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर इसका प्रसारण होगा, उसकी नीतियां इसकी इजाज़त देंगी.
एमनेस्टी इंटरनेशनल के आंकड़ों के मुताबिक़, पिछले साल सबसे ज़्यादा लोगों को चीन में मौत की सज़ा दी गई. इसके बाद ईरान, सऊदी अरब, यमन और अमेरिका का नंबर था.
अमेरिका की संघीय सरकार ने 17 साल तक किसी को मौत की सज़ा नहीं दी थी. यह सिलसिला ट्रंप के पहले कार्यकाल के आख़िरी साल में ख़त्म हुआ, जब सरकार ने एक के बाद एक 13 लोगों को मौत की सज़ा दी.
दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने जल्द ही अपने पूर्ववर्ती जो बाइडन की ओर से संघीय मौत की सजाओं पर लगाई गई रोक हटा दी.
अमेरिका में सेना के किसी सदस्य को आख़िरी बार 1961 में मौत की सज़ा दी गई थी. तब अमेरिकी सेना के एक सैनिक को 11 साल की ऑस्ट्रियाई लड़की से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद मौत की सज़ा दी गई थी.
तत्कालीन राष्ट्रपति ड्वाइट डी आइज़नहावर ने इस सज़ा को मंज़ूरी दी थी. पीड़िता के परिवार ने उनके बाद राष्ट्रपति बने जॉन एफ़ कैनेडी से सज़ा माफ़ करने की अपील की थी, लेकिन इसके बावजूद सैनिक को सज़ा-ए-मौत दी गई.
अमेरिकी सेना में फ़ायरिंग स्क्वॉड के ज़रिए आख़िरी बार जनवरी 1945 में मौत की सज़ा दी गई थी. दूसरे विश्व युद्ध के आख़िरी महीनों में अमेरिकी सेना के एक युवा सैनिक एडी स्लोविक को गोली मार दी गई थी. उन्हें सेना से भागने का दोषी ठहराया गया था.
क्वासी ग्याम्फ़ी असिएदु और काली हेज़ की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ
हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.
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