साढ़ थाना क्षेत्र के हिरनी गांव में रविवार सुबह करीब 9:30 बजे बारिश के बीच एक कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में मलबे के नीचे दबकर पिता समेत चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों में पिता और उनकी तीन बेटियां शामिल हैं। वहीं, एक बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे के बाद गांव में चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का काम शुरू किया।
हादसा साढ़ थाना क्षेत्र के हिरनी गांव में हुआ। जानकारी के अनुसार पिछले कुछ दिनों से जोरदार बारिश हो रही है। जिसके चलते कई जगह पानी भर गया है। बारिश के पानी का असर सबसे ज्यादा कच्चे मकानों पर पड़ा है। गांव का मुकेश अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रहता है। मुकेश मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। रविवार सुबह साढ़े नौ बजे अचानक से उसका मकान भरभराकर ढह गया। हादसे के समय मुकेश परिवार समेत मकान में ही मौजूद था, जिसके चलते 45 वर्षीय मुकेश, उसकी चार बेटियां काजल (19), माया (16), नीत (12) और पल्लवी (7) मलबे में दब गईं। मकान गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए मलबा हटाकर दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू शुरू कर दिया। घटना की जानकारी पुलिस और प्रशासन को भी दी गई।
ग्रामीणों और पुलिस की मदद से करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद मलबे में दबे सभी पांच लोगों को बाहर निकाला गया। इसके बाद सभी को पतारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया। यहां डॉक्टरों ने मुकेश और उनकी तीन बेटियों माया, नीत और पल्लवी को मृत घोषित कर दिया। वहीं काजल की हालत गंभीर होने पर उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। परिजनों के अनुसार काजल का इलाज हैलट अस्पताल में चल रहा है।
हादसे ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। परिजनों ने बताया कि काजल उर्फ लक्ष्मी की शादी दिसंबर में होने वाली थी। उसकी शादी सम्मेलन के जरिए तय हुई थी। हादसे में काजल गंभीर रूप से घायल हो गई और अब अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है।
मुकेश के चचेरे भाई तेज बहादुर सिंह ने साढ़ पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि मकान गिरने के बाद परिजन लगातार पुलिस को फोन करते रहे, लेकिन शुरुआत में फोन रिसीव नहीं हुआ। काफी देर बाद पुलिस से संपर्क हो सका। तेज बहादुर के मुताबिक, पुलिस के समय पर मौके पर नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीणों ने खुद राहत-बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने करीब दो घंटे तक मलबा हटाया और पांचों लोगों को बाहर निकालकर पतारा सीएचसी पहुंचाया।
परिजनों ने पतारा सीएचसी की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि घायल काजल को अस्पताल पहुंचाने के बाद वहां तत्काल इलाज के लिए डॉक्टर मौजूद नहीं थे। इससे नाराज ग्रामीणों ने हंगामा किया। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर उपचार मिल जाता तो शायद जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले कई दिनों से क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी। इसके चलते कच्चे मकान की दीवारें और छत कमजोर हो गई थीं। रविवार सुबह बारिश के दौरान अचानक मकान भरभराकर ढह गया। देखते ही देखते पूरा परिवार मलबे में दब गया। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी जुटाई। प्रशासन की ओर से राहत-बचाव और हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
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