उत्तर प्रदेश में अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने के दौरान तय ड्रेस कोड पहननी होगी। चाहे वे व्यक्तिगत रूप से पेश हो रहे हों या वर्चुअल माध्यम से, ड्रेस कोड में वे किसी प्रकार की छूट नहीं ले सकेंगे। इसके साथ ही कोर्ट में हलफनामा दाखिल करते वक्त भी स्याही और फोटो को लेकर पूरी सावधानी बरतनी होगी। हलफनामे में लगने वाली फोटो हाल की तो होनी ही चाहिए इसमें भड़कीले कपड़े, खुले बाल या रंगीन चश्मे नहीं चलेंगे। यही नहीं हलफनामे पर दस्तखत के लिए भी सिर्फ नीली स्याही से ही इस्तेमाल करना होगा। प्रदेश के नियुक्ति अनुभाग ने सभी आईएएस, मंडलायुक्तों, पुलिस आयुक्तों और जिलाधिकारियों के लिए इस संबंध में आदेश जारी किए है।
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और चीफ स्टैंडिंग काउंसिल मनोज कुमार सिंह के पत्र के बाद प्रदेश शासन ने यह कदम उठाया है। न्यायालय की गरिमा और प्रोटोकॉल बनाए रखने को लेकर प्रदेश के सभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रभारी मुख्य स्थायी अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह ने मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (न्याय) को पत्र लिखकर बताया था कि न्यायालय के आदेशों के क्रम में जब अधिकारी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होते हैं या हलफनामा दाखिल करते हैं तो अक्सर वे निर्धारित प्रोटोकॉल और कोर्ट की गरिमा का पालन नहीं करते।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वयं उन्हें बुलाकर राज्य सरकार को तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश और सर्कुलर जारी करने को कहा था। इसी पत्र के आधार पर न्याय विभाग से होते हुए नियुक्ति अनुभाग ने सभी आईएएस, मंडलायुक्तों, पुलिस आयुक्तों और जिलाधिकारियों के लिए आदेश जारी किए हैं।
नई गाइडलाइन के अनुसार कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से चाहे शारीरिक रूप से हाजिर होना हो या वर्चुअल माध्यम से, अधिकारियों को अनिवार्य रूप से निर्धारित ड्रेस कोड में ही उपस्थित होना होगा। हलफनामे पर लगने वाली फोटो हाल ही की और शालीन कपड़ों में होनी चाहिए। फोटो में आधुनिक और भड़कीले कपड़े, खुले बाल या रंगीन चश्मे पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। शपथ पत्र दाखिल करने वाले अधिकारी या शपथ आयुक्त/नोटरी के हस्ताक्षर और मोहर में लाल, काली, हरी या अन्य किसी स्याही का इस्तेमाल नहीं होगा। इसके लिए केवल नीले रंग की स्याही का ही प्रयोग अनिवार्य किया गया है। शासन ने सभी विभागों के प्रमुखों और जिलाधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।
बता दें कि अतीत में भी न्यायालय में पेश होने के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को ड्रेस कोड को लेकर चेतावनियां मिलती रही हैं। कई बार ड्रेस कोड सही नहीं होने पर कोर्ट में उन्हें टोका गया है। पिछले साल इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक पुलिस अधिकारी के निर्धारित पुलिस वर्दी की बजाए सामान्य नागरिक पोशाक में अदालत के सामने पेश होने पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों को अदालत की कार्यवाही की मर्यादा बनाए रखने के लिए उचित ड्रेस कोड में उपस्थित होना चाहिए।
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