एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जीतेंद्र मिश्रा को अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाया गया है। महंत गोविंद देव गिरि को ट्रस्ट का महासचिव और नवनियुक्त ट्रस्टी महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। महंत गोविंद देव गिरि अब चंपत राय की जगह लेंगे। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए संवाददाताओं को बताया कि राम मंदिर कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर उठे विवाद के बाद हुई ट्रस्ट की तीसरी बैठक में इन नामों पर मुहर लगाई गई है।
उन्होंने बताया कि सीईओ पद के लिये 5,585 आवेदनों में से चयनित किए गए तीन उम्मीदवारों में से मिश्रा को इस पद के लिये चुना गया। छह जुलाई को ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव बनाए गए कृष्ण मोहन ने बताया कि अब नियमित महासचिव के पद पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष रहे गोविंद देव गिरि को नियुक्त करने का फैसला किया गया है।उन्होंने कहा कि अब कोषाध्यक्ष का दायित्व नवनियुक्त न्यासी महेश भागचंदका संभालेंगे।
नवनियुक्त महासचिव गिरि ने बताया कि सीईओ के कामकाज के लिये मानक संचालन प्रक्रियाएं आने वाले दिनों में तैयार की जाएंगी, जिनमें उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का विवरण होगा। कृष्ण मोहन ने बताया कि बैठक में अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और शिकोहाबाद की डॉक्टर निर्मला यादव को ट्रस्ट में नए ट्रस्टी के तौर पर शामिल करने का निर्णय भी लिया गया है। उन्होंने बताया कि बैठक में आंतरिक अंकेक्षण के लेखे पेश किये गये, जिनके अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में 237 करोड़ की आय हुई और खर्च 91 करोड़ रुपये हुए, निर्माण कार्यों पर 425 करोड़ का पूंजीगत व्यय हुआ है तथा 31 मार्च 2026 को ट्रस्ट के पास कुल उपलब्ध धनराशि 1882 करोड़ रुपये थी।उन्होंने बताया कि न्यासी मंडल ने इन लेखों को अनुमोदित किया है। सूत्रों के मुताबिक सीईओ की नियुक्ति का फैसला एक 'सर्च कमेटी' की सिफारिशों पर विचार-विमर्श के बाद लिया गया, जिसने इस पद के लिए तीन उम्मीदवारों के नाम तय किये थे।
उन्होंने बताया कि सेवानिवृत न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली 'सर्च कमेटी' में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी तथा पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हवारे शामिल थे और इस समिति ने मंगलवार को ट्रस्ट के तत्कालीन कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी। समिति के सचिव समीर पंडा ने बताया कि समिति ने नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन की विशेषज्ञता, ईमानदारी और अन्य मानकों के अनुरूप आकलन करने के बाद तीन 'बहुत योग्य पेशेवरों' की सिफारिश की थी। सूत्रों के मुताबिक नवनियुक्त सीईओ मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। छह दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना में शामिल हुए फाइटर पायलट मिश्रा ने 30 अप्रैल 2026 को रिटायर होने से पहले 39 साल से अधिक समय तक सेवा की।
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