आज के समय में स्वस्थ दिखना, क्या स्वस्थ होने की गारंटी है? जवाब है- नहीं। जिस तरह से लोगों की दिनचर्या और खानपान में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, इसने कई तरह की तरह की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा काफी बढ़ा दिया है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में 30 से कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक-कार्डियक अरेस्ट से मौत की खबरें काफी सुर्खियों में रही हैं। हार्ट अटैक की तो चर्चा अक्सर होती ही रहती है पर क्या आप जानते हैं कि इसी तरह के स्ट्रोक के मामलों में भी काफी तेजी से वृद्धि हो रही है।
क्या है पूरा मामला? ब्रिटेन की स्थानीय मीडिया में प्रकाशित में 33 साल की बेक्की बराट का जिक्र मिलता है। इस साल अप्रैल में एक रविवार सुबह बेक्की बराट अपने सोफे पर बैठी थीं। उनकी गोद में उनका तीन हफ्ते का बेटा ब्यूडेन था और पास ही उनकी दो साल की बेटी अराया खेल रही थी। उस वक्त बेक्की को जिंदगी बेहद खूबसूरत और सुकून भरी लग रही थी। बेक्की स्वास्थ्य और फिटनेस कोच हैं। कुछ ही देर पहले उन्होंने अपने पति जेम्स से कहा था कि बच्चे को जन्म दिए कुछ ही हफ्ते हुए हैं, फिर भी वह खुद को बेहद अच्छा महसूस कर रही हैं। लेकिन अगले ही कुछ मिनटों में सबकुछ बदल गया। 33 वर्षीय बेक्की बताती हैं, जेम्स ऊपर शौचालय जाने के लिए गए थे। तभी अचानक मेरे शरीर पर एक अजीब और भारीपन जैसा एहसास हुआ। बाएं हाथ में अपने आप ऐंठन होने लगी। मैंने किसी तरह ब्यूडेन को फर्श पर सुलाया। लेकिन जैसे ही मैंने खड़े होने की कोशिश की, मेरा बांया पैर पूरी तरह सुन्न हो गया और मैं जमीन पर गिर गई। मैं हिल भी नहीं पा रही थी। मेरी आवाज लड़खड़ा रही थी लेकिन कोशिश करके मैंने जेम्स को आवाज लगाई। आनन फानन में बेक्की को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने बताया कि ये स्ट्रोक था। बेक्की कहती हैं, मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ये हुआ क्या है। मे फिटनेस कोच थी, खान-पान अच्छा था, हाई ब्लड प्रेशर भी नहीं था ऐसे में उन्हें स्ट्रोक कैसे हो सकता था?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि स्ट्रोक का सबसे आम प्रकार इस्केमिक स्ट्रोक होता है। इसमें खून का थक्का किसी रक्त नली को रोक देता है और दिमाग तक खून व ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाती है। करीब 85 प्रतिशत स्ट्रोक इसी तरह के होते हैं।
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बेक्की के हाल ही में मां बनने को उनके स्ट्रोक की एक संभावित वजह माना जा रहा है। विरल यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में स्ट्रोक विशेषज्ञ प्रोफेसर डेब लोवे कहते हैं, गर्भावस्था और बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद का समय स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाने वाला माना जाता है। गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर पर काफी दबाव होता है। इस दौरान हाई ब्लड प्रेशर और खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है।इसी वजह से गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का ब्लड प्रेशर नियमित रूप से जांचा जाता है। 2017 में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित करीब 20 लाख महिलाओं पर हुए एक अध्ययन के अनुसार, बच्चे के जन्म के आसपास के दिनों में महिला को स्ट्रोक होने का जोखिम सामान्य समय की तुलना में करीब नौ गुना अधिक हो सकता है। प्रसव के बाद के छह हफ्तों में भी यह जोखिम सामान्य समय की तुलना में करीब तीन गुना अधिक रहता है। अनुमान है कि हर एक लाख गर्भावस्थाओं में करीब 30 स्ट्रोक हो सकते हैं। जिन महिलाओं को प्री-एक्लेम्पसिया यानी गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की गंभीर समस्या होती है, उनमें खतरा काफी ज्यादा होता है। इस समूह में करीब 500 प्रसव में से एक में स्ट्रोक होने की बात सामने आई है।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वोल्फसन सेंटर फॉर द प्रिवेंशन ऑफ स्ट्रोक एंड डिमेंशिया की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. लिनशिन ली कहती हैं, कम उम्र में स्ट्रोक बढ़ने के कई संभावित कारणों पर शोध चल रहा है। साल 2022 में जामा न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि 55 साल से कम उम्र के लोगों में स्ट्रोक की घटनाएं 2002-2010 की अवधि की तुलना में 2010-2018 के बीच 67 प्रतिशत बढ़ गईं। वहीं बुजुर्गों में स्ट्रोक की दर कम हुई। हाई ब्लड प्रेशर, अधिक वजन और धूम्रपान को इसका बड़ा कारण माना जाता रहा है। डॉ. ली के शोध में खास तौर पर उन युवा मरीजों में स्ट्रोक बढ़ने की दर अधिक देखी गई, जिनमें ये सामान्य जोखिम कारक मौजूद नहीं थे। इससे लंबे समय तक काम करना, ज्यादा तनाव और वायु प्रदूषण जैसे दूसरे कारणों पर ध्यान गया। डॉ. ली के कहते हैं, लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा काम करने से दिल की धड़कन की सामान्य लय प्रभावित हो सकती है और इसके कारण भी स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। वायु प्रदूषण भी स्ट्रोक के संभावित कारणों में शामिल माना जा रहा है। प्रदूषित हवा शरीर में सूजन बढ़ा सकती है और इससे खून में थक्का बनने का खतरा बढ़ सकता है। स्ट्रोक से बचाव के लिए एक आसान लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाना है।
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