नेपाल में बाढ़ से तबाही के बाद यूपी के महाराजगंज, कुशीनगर और अन्य संवेदनशील जिलों का प्रशासन अलर्ट मोड पर है। इस बीच बलरामपुर जिले से बाढ़ का खतरा बढ़ने की सूचना मिल रही है। राप्ती नदी का जलस्तर शनिवार को लगभग डेढ़ सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। शाम पांच बजे तक नदी का जलस्तर 102.930 मीटर पहुंच गया था, जो चेतावनी बिंदु के बेहद करीब है। हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि अभी चिंता की कोई बात नहीं है। लगातार जलस्तर की निगरानी की जा रही है। राप्ती नदी अभी भी खतरे के निशान से लगभग डेढ़ मीटर नीचे है। इन सबके बावजूद तटवर्ती गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है। सभी व्यवस्थाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
हालांकि अभी जिले में भारी बारिश नहीं हो रही है। फिर भी नेपाल की पहाड़ियों पर हो रही वर्षा के कारण एक बार फिर राप्ती नदी का जलस्तर चेतावनी बिन्दु के करीब पहुंच गया है। शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे के करीब नदी का जलस्तर बढ़कर 102.850 मीटर पहुंच गया। दोपहर साढ़े 12 बजे के करीब राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए 102.910 मीटर पहुंचा, इसके बाद जलस्तर बढ़ने की गति में थोड़ी कमी आयी। शाम पांच बजे तक राप्ती नदी का जलस्तर 102.930 पहुंच गया है, जो चेतावनी बिन्दु से महज 0.69 मीटर नीचे था। आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने बताया कि राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। फिर भी अभी बाढ़ जैसी कोई समस्या नहीं है। इन सबके बावजूद सभी स्थितियों पर नजर रखी जा रही है। राप्ती नदी का चेतावनी बिन्दु 103.620 मीटर और खतरे का निशान 104.620 मीटर निर्धारित किया गया है। जलस्तर 104.620 के ऊपर जाने के बाद ही बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होगी।
उधर, महाराजगंज में लोग नेपाल के उत्तरी हिस्सों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में तबाही मचाने वाले फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल से आ रहे गंडक नदी के डिस्चार्ज और जलस्तर पर टकटकी लगाए हुए हैं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा शनिवार शाम 4 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार गंडक नदी का जलस्तर फिलहाल नियंत्रण में है। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज का डिस्चार्ज 99 हजार 800 क्यूसेक दर्ज किया गया है। यह सुबह 8 बजे से स्थिर बना हुआ है। बैराज का अपस्ट्रीम जलस्तर 110.41 मीटर व डाउनस्ट्रीम जलस्तर 106.86 मीटर है। यह खतरे के निशान 109.670 मीटर से नीचे है। डिस्चार्ज एक लाख क्यूसेक से नीचे और स्थिर रहने के कारण फिलहाल दियारा क्षेत्र के गांवों पर बाढ़ का सीधा खतरा टला हुआ है। सोहगीबरवा में रोहुआ नाला का उफान घटने के बाद अब सड़क पर नाव चलने के बाद लोग उसे पैदल ही पार कर रहे हैं।
गंडक नदी में डिस्चार्ज स्थिर रहने से राहत जरूर है, लेकिन जिले की रोहिन नदी के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। त्रिमुहानी घाट पर रोहिन का जलस्तर सुबह 78.35 मीटर था। यह शाम 4 बजे बढ़कर 79.17 मीटर पर पहुंच गया है, लेकिन खतरा स्तर 82.44 मीटर के नीचे है। रतनपुर बैराज पर डिस्चार्ज 200 से बढ़कर 245 क्यूसेक दर्ज किया गया है। प्यास नदी का जलस्तर सुबह के मुकाबले घटकर 100.70 मीटर पर आ गया है। रिगोली में राप्ती नदी का जलस्तर भी गिरकर 76.37 मीटर दर्ज किया गया है। महाव नाले का जलस्तर सुबह 4 फीट था जो शाम को घटकर 3 फीट 6 इंच पर आ गया है।
चीन सीमा पर तिब्बत के ऊपरी क्षेत्रों में भारी भूस्खलन व ग्लेशियर टूटने से भोटेकोशी व त्रिशूली नदी बेसिन में मलबे के कारण कई अस्थायी झीलें बन गई हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण व चीनी अधिकारियों ने इन झीलों के ओवरफ्लो होने और अचानक टूटने की आशंका को देखते हुए बीते शुक्रवार को अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि झीलों से पानी का अचानक प्रवाह बढ़ने पर निचले तटीय इलाकों में फिर विनाशकारी फ्लैश फ्लड आ सकती है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे लोगों को तत्काल सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की सख्त हिदायत दी है। सोहगीबरवा के दियारा में बसे लोग बाल्मिकिनगर बैराज से डिस्चार्ज के साथ-साथ नेपाल सरकार से जारी अलर्ट पर भी निगाहें जमाएं हुए हैं।
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