पश्चिम एशिया में बढ़ते भू‑राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी के कारण भारतीय शेयर बाजार लगातार चार व्यापारिक सत्रों तक गिरा। इस दौरान BSE‑सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट वैल्यूएशन लगभग ₹20.79 लाख करोड़ घटकर ₹4,51,83,393.14 करोड़ रह गया।
बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार को 125.56 अंक (0.17 %) गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। छोटे‑छोटे ट्रेडिंग हफ्ते में कुल 1,605.44 अंक (2.15 %) की गिरावट दर्ज की गई। इस हफ्ते सेंसेक्स 1,600 अंक से अधिक नीचे गिर चुका है।
बाजार में गिरावट के पाँच प्रमुख कारण
- पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव – अमेरिका‑ईरान और संभावित अमेरिकी‑इज़रायली टकराव की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया।
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी – ब्रेंट 116.73 USD/बैरल पर पहुंच गया, जिससे महंगाई के दबाव का डर बढ़ा।
- महंगाई की आशंका – महंगे तेल से कंपनियों की लागत बढ़ने और उपभोक्ता कीमतों में उछाल की संभावना ने बिकवाली को तेज़ किया।
- अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट – US‑मार्केट की कमजोरी ने भारतीय निवेशकों के मनोभाव को नकारात्मक बना दिया।
- रुपए में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी – दोनों कारकों ने विदेशी पूँजी के प्रवाह को घटा कर घरेलू बाजार पर दबाव डाला।
तेल की उछाल से महंगाई की चिंता बढ़ी
पश्चिम एशिया में भू‑राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट 3 % उछलकर 116 USD/बैरल के पाँच‑महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च‑वेल्थ मैनेजमेंट प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, इस स्थिति से महंगाई के दबाव और कंपनियों की लागत दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बाजार में बिकवाली जारी रहेगी।
सबसे अधिक गिरावट वाले शेयर
शुक्रवार को टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स के शेयर 3 % से अधिक गिरकर सेंसेक्स में सबसे अधिक गिरावट वाले रहे। इसके अलावा ट्रेंट, टेक महिंद्रा, BEL, इंडिगो, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एनटीपीसी, SBI और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर भी नीचे बंद हुए। वहीं, इटरनल, L&T, रिलायंस, TCS, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी इंडिया, इंफोसिस और आईसीआईसीआई बैंक ने बढ़त दर्ज की।
विदेशी निवेशकों का रुख और आगे की संभावनाएँ
इक्विरस वेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर पुंज ने बताया कि अमेरिकी बाजार की गिरावट, तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की कमजोरी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली को तेज़ किया। हालांकि एशिया के कई बाजारों में सुधार देखा गया, भारत में महंगे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण महंगाई की चिंता बनी रही।
अगले हफ्ते जियो प्लेटफ़ॉर्म्स का ₹30,213 करोड़ का IPO 22.19 गुना सब्सक्राइब हो चुका है और 28 अक्टूबर को BSE‑NSE में लिस्ट होगा। इस लिस्टिंग के साथ ही निवेशकों की नज़र 27‑28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की मौद्रिक नीति बैठक, अमेरिकी बेरोजगारी एवं जीडीपी आंकड़े, और बैंक ऑफ जापान के ब्याज दर निर्णय पर भी रहेगी।
कंपनियों के Q2 परिणाम – पेटीएम, टाटा कंज्यूमर, L&T, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, ट्रेंट, सन फार्मा और BEL – भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बाजार को संभालने के संभावित संकेत
- कंपनियों के बेहतर Q2 परिणाम
- फेड की दर नीति में राहत संकेत
- जियो प्लेटफ़ॉर्म्स की सफल लिस्टिंग
- विदेशी निवेशकों की पुनः खरीदारी
- रुपए में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट
- तेल की कीमतों में गिरावट और भू‑राजनीतिक तनाव का कम होना
- अमेरिका और जापान के सकारात्मक आर्थिक डेटा
इन संकेतों के आधार पर निवेशक अगले हफ्ते बाजार की दिशा पर बारीकी से नजर रखेंगे। यदि तेल महंगा बना रहा और भू‑राजनीतिक तनाव बढ़ता रहा, तो महंगाई की चिंता बाजार को दबाव में रखेगी; वहीं, सकारात्मक आर्थिक डेटा और विदेशी पूँजी के प्रवाह से बाजार को राहत मिल सकती है।
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