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बिहार में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बेगूसराय के मटिहानी प्रखंड में गंगा का पानी 17 सरकारी विद्यालयों तक पहुंच गया है, जिससे स्कूलों में पठन-पाठन प्रभावित हुआ है और शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में टैग किया गया है। वहीं गया के मानपुर प्रखंड में पेमार नदी का पानी सड़क के ऊपर से बहने के कारण गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई, रोजमर्रा की जरूरतों और किसानों की धान की फसल पर संकट मंडरा रहा है। दूसरी ओर सारण जिले में संभावित बाढ़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों की टीम लगातार प्रभावित और संभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही है, जबकि कई इलाकों में नावों का संचालन भी शुरू कर दिया गया है।
मटिहानी में 17 स्कूलों तक पहुंचा गंगा का पानी
बेगूसराय के मटिहानी प्रखंड के निचले इलाकों में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। बाढ़ का पानी अब केवल घरों और सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विद्यालयों के परिसर और भवनों के आसपास भी पहुंच गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ शिक्षकों के लिए भी विद्यालय पहुंचना मुश्किल हो गया है। मटिहानी प्रखंड के 17 विद्यालय बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। कई स्कूलों में पानी परिसर से आगे बढ़कर भवन और शैक्षणिक गतिविधियों वाले हिस्सों तक पहुंच गया है। ऐसे में बच्चों को विद्यालय बुलाना जोखिम भरा माना जा रहा है। प्रधानाध्यापकों की ओर से दिए गए आवेदन के आधार पर प्रभावित विद्यालयों में शैक्षणिक कार्य तत्काल स्थगित करने की प्रक्रिया अपनाई गई है।
इन 17 विद्यालयों में पहुंचा बाढ़ का पानी
बाढ़ प्रभावित विद्यालयों में प्राथमिक विद्यालय कासिमपुर बलुआही, नव प्राथमिक विद्यालय महेंद्रपुर टोला, प्राथमिक विद्यालय महेंद्रपुर, मध्य विद्यालय बलहपुर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिंहपुर, कन्या प्राथमिक विद्यालय छितरौर, नवसृजित प्राथमिक विद्यालय रविदास टोला छितरौर, मध्य विद्यालय छितरौर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिहमा दियारा, उच्च माध्यमिक विद्यालय सिहमा दियारा, प्राथमिक विद्यालय सिहमा पथला टोला, मध्य विद्यालय लवहरचक, प्राथमिक विद्यालय आकाशपुर, प्राथमिक विद्यालय रामनगर नया टोला, उच्च विद्यालय महेंद्रपुर, मध्य विद्यालय खोरमपुर चकौर और उच्च माध्यमिक विद्यालय खोरमपुर चकौर शामिल हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर भी असर
बाढ़ जैसे हालात का सबसे बड़ा असर स्कूली बच्चों पर पड़ा है। पानी के तेज बहाव के कारण अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। मध्य विद्यालय अमरी के प्रभारी प्रधानाध्यापक सुनील प्रसाद के मुताबिक विद्यार्थियों की उपस्थिति में काफी गिरावट आई है और कई बच्चे कई दिनों से स्कूल नहीं पहुंच पाए हैं।
राशन और इलाज के लिए भी परेशानी
ग्रामीण राजा कुमार, कुश कुमार और धनंजय कुमार ने बताया कि परोरिया बाजार उनकी रोजमर्रा की जरूरतों का मुख्य केंद्र है। लेकिन सड़क पर पानी बहने के कारण राशन, दवा और अन्य जरूरी सामान लाना मुश्किल हो गया है। बीमार लोगों को अस्पताल या डॉक्टर तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन गया है। कई परिवारों को इसके लिए लंबा और कठिन रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
धान की खड़ी फसल पर मंडराया संकट
लगातार जलभराव से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। खेतों में पानी भरने के कारण धान की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द पानी नहीं निकला तो फसल खराब हो सकती है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। पानी बढ़ने के साथ ग्रामीणों को सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के घरों की ओर आने का डर भी सताने लगा है। लोगों का कहना है कि आसपास के इलाकों में जलभराव बढ़ने से यह खतरा और बढ़ गया है।
पुरानी बाढ़ की याद से डरे ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ वर्ष पहले आई भीषण बाढ़ में गांव के दर्जनों घर बह गए थे। उस समय कई परिवारों को गांव छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा था। वर्तमान में करीब 200 परिवार गांव में रह रहे हैं। लगातार बारिश के बीच लोगों को फिर उसी तरह की बाढ़ आने की आशंका सताने लगी है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से प्रभावित इलाके का तत्काल निरीक्षण करने, सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने, जल निकासी कराने और जरूरत पड़ने पर नाव उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बारिश जारी रही तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सारण में बाढ़ की आशंका, प्रशासन अलर्ट मोड पर
उधर, सारण जिले में बाढ़ की संभावित गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर जिले के विभिन्न बाढ़ प्रभावित और संभावित क्षेत्रों में अधिकारियों ने ताबड़तोड़ स्थल निरीक्षण शुरू किया है। प्रशासन का फोकस किसी भी आपात स्थिति से पहले तैयारी पूरी करने और जरूरत पड़ने पर लोगों तक समय पर राहत पहुंचाने पर है।
संवेदनशील इलाकों में अधिकारियों ने लिया जायजा
छपरा सदर प्रखंड के दक्षिणी क्षेत्र के कोटवा पट्टी रामपुर, बरहरा, मांझी, रायपुर और बिनगांव में अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया। दिघवारा प्रखंड के दियारा क्षेत्र अकिलपुर, गरखा प्रखंड के मौजमपुर, इटवा और श्रीपाल बसंत तथा रिविलगंज प्रखंड के दलिया और रहीमपुर क्षेत्रों में भी बाढ़ की स्थिति का आकलन किया गया।
सोनपुर प्रखंड को सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में माना जा रहा है। यहां सबलपुर पूर्वी, सबलपुर पश्चिमी, सबलपुर उत्तरी, सबलपुर मध्यवर्ती, नजरमीरा, शाहपुर, खरीका, घरपुरा, गंगाजल, कसमर, सैदपुर, हासिलपुर, रसूलपुर, सितापुर और कल्याणपुर समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने नदियों के बढ़ते जलस्तर, आवागमन के साधनों, तटबंधों की मजबूती और स्थानीय लोगों की तात्कालिक जरूरतों की जानकारी ली।
डीएम और एसएसपी ने किया संयुक्त निरीक्षण
जिला प्रशासन की कार्ययोजना के तहत वरिष्ठ अधिकारी भी खुद मैदान में उतरकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। सोनपुर प्रखंड में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार ने संयुक्त रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। दोनों अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को पूरी तत्परता के साथ काम करने के निर्देश दिए।
रिविलगंज और दिघवारा प्रखंड में अपर समाहर्ता, आपदा प्रबंधन और सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। वहीं छपरा सदर प्रखंड में अपर समाहर्ता, विधि-व्यवस्था ने क्षेत्र की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने और किसी भी संकट की स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने का निर्देश दिया गया है।
राहत सामग्री और बचाव संसाधनों की व्यवस्था
संभावित आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने प्रखंडों को राहत और बचाव सामग्री पहले ही उपलब्ध करा दी है। सोनपुर अंचलाधिकारी को तत्काल राहत के लिए 1,000 पॉलीथिन शीट और दिघवारा अंचलाधिकारी को 500 पॉलीथिन शीट दी गई हैं।सोनपुर अंचलाधिकारी को एक महाजाल, 25 लाइफ जैकेट और 15 लाइफ बॉय उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा छपरा सदर, दिघवारा, गरखा और रिविलगंज के अंचलाधिकारियों को प्रत्येक को 20-20 लाइफ जैकेट और 15 से 18 लाइफ बॉय दिए गए हैं, ताकि डूबने जैसी घटनाओं की स्थिति में तत्काल बचाव किया जा सके।
चार प्रखंडों में नावों का संचालन शुरू
बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन और जरूरत पड़ने पर आपातकालीन निकासी के लिए नावों का संचालन भी शुरू कर दिया गया है। फिलहाल सोनपुर प्रखंड में सबसे अधिक 25 नावें चलाई जा रही हैं। इसके अलावा छपरा सदर में 16, दिघवारा में 9 और रिविलगंज में 6 नावों का संचालन हो रहा है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर नावों की संख्या और बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सामुदायिक रसोई और सुरक्षित आश्रय पर जोर
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से जुड़े पदाधिकारियों को सामुदायिक रसोई का संचालन सुनिश्चित करने, ऊंचे स्थानों पर सुरक्षित आश्रय स्थल तैयार रखने और पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पेयजल की शुद्धता और स्वच्छता व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
फिलहाल बेगूसराय, गया और सारण में बाढ़ का असर अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है। कहीं गंगा का पानी स्कूलों तक पहुंचने से पढ़ाई पर ब्रेक लगा है, कहीं सड़क पर नदी का पानी बहने से गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और कहीं प्रशासन संभावित खतरे से पहले राहत-बचाव की तैयारियों को मजबूत कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर पर प्रशासन के साथ-साथ ग्रामीणों की भी नजर बनी हुई है।
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