अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात के मामले में भारत स्थित 4 कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में यह जानकारी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए 'ऑपरेशन इकॉनमिक आउटकास्ट' की घोषणा की।
इसके तहत ईरान के लिए संभावित राजस्व स्रोतों को रोकने के उद्देश्य से नए प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिका ने अन्य देशों से भी ईरान के साथ आर्थिक संबंध खत्म करने के लिए कहा है और ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
विदेश विभाग ने कहा कि इस अभियान की जद में आने वाली भारत स्थित कंपनियों में सीमा-शुल्क ब्रोकर पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी और उसके साझेदार इंदरीसमिया अशरफमिया शेख के अलावा हरीश रामचंद्र रंगी शामिल हैं। इन लोगों ने ईरान से पेट्रोरसायन उत्पादों की कई खेप के आयात में मदद की थी। प्रतिबंध के दायरे में आने वाली अन्य कंपनियों में सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड (Sadashiva Overseas Limited), पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड (PP Softtech Private Limited) और प्रकृतिस इन्फ्रा इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड (Prakrutees Infra Impex Private Limited) शामिल हैं। पीपी सॉफ्टटेक के निदेशक प्रशांत गर्ग भी कार्रवाई की जद में हैं। बयान के मुताबिक, शेख, रंगी और गर्ग तीनों ही भारतीय नागरिक हैं।
जानकारी के मुताबिक सदाशिव ओवरसीज ने करीब 6.9 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया जबकि पीपी सॉफ्टटेक और प्रकृतिस इन्फ्रा ने 2.5-2.5 करोड़ डॉलर मूल्य के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। इन कंपनियों को ईरान से पेट्रोलियम या पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद, अधिग्रहण, बिक्री, परिवहन या विपणन से जुड़े महत्वपूर्ण लेनदेन में जानबूझकर शामिल होने के लिए प्रतिबंध सूची में डाला गया है।
विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बयान में बतासा कि अमेरिका ने ईरानी शासन की अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों को सक्षम बनाने वाली कई संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की है। नए प्रतिबंध ईरान पर अमेरिकी दबाव बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय की गई है जब अमेरिका कथित तौर पर सैन्य कार्रवाई, नाकाबंदी और धमकियों के जरिए ईरान को झुकाने में विफल रहा है।
इस बीच, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तेहरान में ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत की। इस दौरान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को और बढ़ने से रोकने के उपायों और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर चर्चा हुई। बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित करीब 55 किलोमीटर चौड़ा संकरा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से अलग करता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले दुनिया के कुल तेल का करीब पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता था।
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