भुबनेश्वर में रविवार को सर्वन समाज ने आर्थिक आधार पर आरक्षण और यूजीसी (University Grants Commission) के कुछ मौजूदा नियमों के रोल‑बैक को लेकर एक विशाल मार्च आयोजित किया। इस प्रदर्शन में लगभग दो हजार लोग शामिल हुए, जो शहर के राजमार्ग पर एकत्र हुए और प्रमुख सरकारी कार्यालयों के सामने अपनी मांगें दोहराते रहे।
मार्च के दौरान सर्वन समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों ने एक विस्तृत ज्ञापन भी सरकार को सौंपा। ज्ञापन में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण को संवैधानिक रूप से लागू करने की मांग की गई, साथ ही यूजीसी द्वारा हाल ही में प्रस्तावित कुछ नीतियों को रद्द करने की भी अपील की गई। उन्होंने कहा कि मौजूदा आरक्षण प्रणाली में आर्थिक मानदंडों की कमी से कई योग्य छात्रों को अवसर नहीं मिल पाते।
समाज के नेता राजेश्वर सिंह ने बताया, “हमारा उद्देश्य केवल आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग नहीं, बल्कि शिक्षा की समान पहुँच सुनिश्चित करना है। यूजीसी के कुछ नियमों ने छात्रों के चयन में अनावश्यक जटिलता बढ़ा दी है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को नुकसान हो रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि सर्वन समुदाय ने इस मुद्दे को लेकर कई बार सरकार को लिखित में अपील की है, पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
दूसरी ओर, राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को गंभीरता से लिया जाएगा, परन्तु इसके लिए उचित विधायी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूजीसी के नियमों में कोई भी बदलाव केवल केंद्रीय स्तर पर ही किया जा सकता है, और राज्य सरकार इस प्रक्रिया में सहयोग करेगी।
मार्च के दौरान पुलिस ने व्यवस्था बनाए रखी और कोई बड़ी बाधा नहीं आई। पुलिस ने कहा कि यदि शांति और कानून का उल्लंघन नहीं हुआ तो ऐसी आवाज़ें लोकतंत्र की स्वस्थ अभिव्यक्ति हैं।
समुदाय के कई युवा छात्रों ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, और इस कारण वे आरक्षण की मांग को अपना अधिकार मानते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन मांगों को स्वीकार नहीं करती, तो आगे भी ऐसी ही धरने और आंदोलन जारी रहेंगे।
इस घटना के बाद कई राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “आरक्षण का मुद्दा सामाजिक न्याय का मूलभूत हिस्सा है, और आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करना सामाजिक समता को बढ़ावा देगा।” वहीं बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “आरक्षण नीति को बदलने से पहले व्यापक सामाजिक संवाद आवश्यक है, ताकि सभी वर्गों के हितों का संतुलन बना रहे।”
अंत में, सर्वन समाज ने कहा कि वे सरकार से शीघ्र उत्तर की अपेक्षा रखते हैं और यदि आवश्यक हुआ तो अगले चरण में वैध कानूनी उपायों का सहारा लेंगे।
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