पीड़ित डॉक्टर का इलाज कर रहे फिजीशियन डॉ. विजय अग्रवाल ने बताया कि स्क्रीनिंग जांच पॉजिटिव आने के बाद मरीज को स्वाइन फ्लू के उपचार की दवा टेमिफ्लू दी गई। मंगलवार को आई आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट में भी संक्रमण की पुष्टि हुई। मरीज को तीन दिन पहले तेज बुखार आया था। साथ ही जुकाम और अत्यधिक कमजोरी के लक्षण थे। स्वाइन फ्लू संक्रमित डॉक्टर के साथ रह रहे उसके माता-पिता को भी एहतियात के तौर पर टेमिफ्लू दी गई है। बचाव के लिए उन्हें एक-एक गोली दी गई, जबकि संक्रमित मरीज के उपचार में दो गोली देने का प्रावधान बताया गया है।
डॉ. विजय अग्रवाल के अनुसार स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीज को बुखार आने के 48 घंटे के भीतर टेमिफ्लू देना जरूरी है। दो दिन बाद यह दवा देने का सामान्यत: कोई खास फायदा नहीं होता। ऐसे में लक्षण दिखाई देने पर समय रहते जांच कराना जरूरी है। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू का वायरस सामान्यत: पांच दिनों तक शरीर में सक्रिय रहता है और इसके बाद मरीज संक्रमण मुक्त हो जाता है।
स्वाइन फ्लू के संक्रमण से पीड़ित मरीजों को सरकारी अस्पतालों में दवा निशुल्क दी जाएगी, लेकिन, यह टेमिफ्लू नाम से नहीं मिलेगी। सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए सेंट्रल ड्रगवेयर हाउस में दवा की आपूर्ति की गई है।
मुरादाबाद में सेंट्रल ड्रगवेयर स्टोर के प्रभारी त्रिवेंद्र चौहान ने बताया कि स्वाइन फ्लू की जेनरिक दवा ओसाल्टा मिबिर के नाम से पहुंची है जिसे जनपद के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों में पहुंचा दिया गया है। सामान्य फ्लू यानि इंफ्लूएंजा से पीड़ित मरीजों के इलाज में भी इस दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उधर, दिल्ली समेत एनसीआर में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ने के मद्देनजर जिले में भी इसकी रोकथाम सुनिश्चित करने व पीड़ित मरीजों को अच्छा इलाज सुनिश्चित कराने को अलर्ट जारी किया गया है।
मुरादाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। कोरोना महामारी के समय इसके संक्रमण का पता लगाने के लिए मंडलीय जिला अस्पताल में आशंकित मरीजों की जो आरटीपीसीआर जांच ताबड़तोड़ तरीके से हुई थी अस्पताल प्रशासन को अब उसकी याद स्वाइन फ्लू का खतरा देखकर फिर से आ गई है। जिला अस्पताल की लैब में इसका उपकरण काफी समय से खराब होने के कारण आरटीपीसीआर जांच नहीं हो पा रही है।
स्वाइन फ्लू आशंकित मरीजों में इसके संक्रमण का पता लगाने के लिए आरटीपीसीआर जांच कराने की जरूरत को शिद्दत से महसूस करते हुए अस्पताल प्रशासन ने इसका उपकरण स्थापित करने वाली कंपनी के साथ संपर्क किया है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.प्रदीप वार्ष्णेय ने बताया कि कंपनी से इंजीनियर को भेजकर आरटीपीसीआर जांच करने वाला उपकरण ठीक कराने को कहा है। स्वाइन फ्लू की जांच में आरटीपीसीआर जांच कारगर है।
चिकित्साधीक्षक डॉ.राजेंद्र कुमार ने बताया कि स्वाइन फ्लू की आशंका वाले मरीजों में गंभीर लक्षण दिखाई देने पर आरटीपीसीआर जांच कराने से इसके संक्रमण का पता चल जाता है।
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