पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की तरह एसाईआर के दौरान अगर आपका नाम भी मतदाता सूची से हट जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। सवाल यह है कि नाम हटने के बाद उसे दोबारा जुड़वाने का रास्ता क्या है और इसके लिए आपको क्या करना होगा? जानिए पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में।
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पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम एसआईआर की मसौदा मतदाता सूची से हटा गया। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 13 अगस्त को जारी की गई पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में हटाए गए लोगों की सूची में राघव चड्डा का नाम भी है। इसके बाद सियासी घमासान जारी है। भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप प्रत्यारोप का भी दौर चल रहा है। चड्ढा का दावा है कि उनका नाम 'दूसरी जगह चले जाने वाला' बताकर सूची से हटाया गया, जबकि उनका मतदाता पहचान पत्र मोहाली में पंजीकृत है। उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और सवाल किया कि आखिर उन्हें ‘दूसरी जगह चले जाने वाला’ किस आधार पर चिह्नित किया गया। चड्ढा ने एसआईआर की प्रक्रिया में चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं होने का भी आरोप लगाया है।
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची को दोबारा जांचने और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में पात्र लोगों के नाम बने रहें और मृत, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके, दो जगह दर्ज या अन्य कारणों से अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।
एसआईआर के तहत अब तक जारी मसौदा मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। यह आंकड़ा तीनों चरणों को मिलाकर है और करीब 14.1% की कमी के बराबर है। पंजाब में मसौदा मतदाता सूची में 20.66 लाख नाम हटाए गए हैं। वहीं, दिल्ली में एसआईआर के तहत मतदाता सूची के ड्राफ्ट में देश में सबसे बड़ी कटौती देखी गई है। दिल्ली में 2025 के कुल 1.56 करोड़ पात्र मतदाताओं में से 47.5 लाख से (47,56,722) मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के मुताबिक, यह कुल 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं।
एसआईआर के दौरान मसौदा मतदाता सूची से नाम बाहर होने के कई कारण हो सकते हैं। दिए गए स्रोत के अनुसार मुख्य कारण हैं,
इसलिए मसौदा सूची में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति का मतदान का अधिकार हमेशा के लिए खत्म हो गया।
सबसे पहले चुनाव आयोग के मतदाता खोज पोर्टल tps://voters.eci.gov.in/) या ECINET एप पर जाकर अपना EPIC नंबर (मतदाता पहचान पत्र संख्या) या पंजीकृत मोबाइल नंबर डालकर चेक करें कि आपका नाम ड्राफ्ट सूची में है या नहीं। अगर नाम नहीं मिलता है तो यह भी देखें कि नाम हटाए जाने के पीछे क्या कारण दिया गया है। अगर आप मतदाता बनने की सभी शर्तें पूरी करते हैं और आपका नाम गलती से छूट गया है, तो आप दावा दाखिल कर सकते हैं।
अगर आप पात्र मतदाता हैं लेकिन एसआईआर की मसौदा मतदाता सूची में आपका नाम नहीं है, तो फॉर्म-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का दावा किया जा सकता है। यह उन पात्र लोगों के लिए भी है जिनका गणना प्रपत्र नहीं भर पाया या घर-घर सत्यापन के दौरान उनका प्रपत्र जमा नहीं हो सका।
इसमें सामान्य तौर पर;
उम्र और पते से संबंधित दस्तावेज आपकी स्थिति और चुनाव आयोग के लागू निर्देशों के अनुसार मांगे जा सकते हैं। उम्र के प्रमाण के लिए संभावित दस्तावेजों में;
पते के प्रमाण के लिए
इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प हैं।
अगर मसौदा मतदाता सूची में आपका नाम मौजूद है लेकिन नाम, पता, लिंग या दूसरी जानकारी में गलती है तो इसके लिए फॉर्म-8 का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके जरिए पात्र मामलों में मतदाता सूची में सुधार या संशोधन कराया जा सकता है।
दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया केवल नाम कटने वाले लोगों के लिए नहीं है। अगर मतदाता सूची में किसी ऐसे व्यक्ति का नाम है जो;
तो उसके नाम पर फॉर्म-7 के जरिए आपत्ति दर्ज की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी या प्रमाण भी देना पड़ सकता है।
नहीं। फॉर्म-6 जमा करने का मतलब यह नहीं है कि नाम अपने आप मतदाता सूची में शामिल हो जाएगा। आवेदन मिलने के बाद संबंधित चुनाव अधिकारी आपके दावे की जांच करेंगे। आपकी पात्रता और आवेदन में दी गई जानकारी का सत्यापन किया जा सकता है। अगर जांच में दावा सही पाया जाता है और आप पात्र हैं, तो आपका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है। इसलिए केवल प्रपत्र भरना पर्याप्त नहीं है। सही जानकारी और जरूरी दस्तावेजों के साथ दावा दाखिल करना जरूरी है।
यहां मसौदा और अंतिम मतदाता सूची के बीच का अंतर समझना जरूरी है। एसआईआर के बाद पहले मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है। इसके बाद पात्र मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज करने का अवसर मिलता है। इस दौरान जिन लोगों का नाम मसौदा सूची में छूट गया है, वे अपना नाम शामिल कराने का दावा कर सकते हैं। इसलिए मसौदा सूची से नाम हटना अंतिम फैसला नहीं है।
दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि 31 अगस्त से 30 सितंबर तक है। इस दौरान जिन पात्र मतदाताओं का नाम मसौदा सूची में नहीं है, वे अपना दावा दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद; दावों की जांच और निपटारा: 29 अक्तूबर तक अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 4 नवंबर, यानी अगर आपका नाम मसौदा सूची में नहीं है तो 30 सितंबर की समय-सीमा बेहद महत्वपूर्ण है।
अगर आपने दावा दाखिल किया, लेकिन अंतिम मतदाता सूची में भी नाम शामिल नहीं हुआ, तो उपलब्ध अपील प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा सकता है। अंतिम सूची में नाम नहीं आने पर निर्धारित अवधि में जिला निर्वाचन अधिकारी या जिलाधिकारी के सामने अपील की जा सकती है। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर भी आगे की प्रक्रिया का प्रावधान है।
अगर आप यूपी या बिहार जैसे ऐसे राज्य के पात्र मतदाता हैं, जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन आपका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ है, तो नाम जुड़वाने का विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं होता। चुनाव आयोग के सामान्य नियमों के मुताबिक, अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी मतदाता सूची का निरंतर अद्यतन होता रहता है।
चुनाव आयोग के अनुसार, पात्र मतदाताओं का नाम गलत तरीके से हटने से रोकने के लिए एसआईआर में कई सुरक्षा उपाय हैं।
चुनाव आयोग के चरण-3 के दस्तावेज के अनुसार, पहले दो चरणों में 13 राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर हो चुका है, जबकि तीसरे चरण में 16 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश यानी कुल 19 जगहों पर एसआईआर की प्रक्रिया है। पहले दो चरणों में बिहार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और लक्षद्वीप में एसआईआर हो चुका है। तीसरे चरण में ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली, नागालैंड और त्रिपुरा में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है।
हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में एसआईआर बाद में कराया जाना है। इन तीनों के लिए कार्यक्रम अभी घोषित नहीं किया गया है। चुनाव आयोग ने इसके पीछे जनगणना के दूसरे चरण के पूरा होने और ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम की स्थिति को ध्यान में रखने की बात कही है।
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