उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में राप्ती नदी के किनारे राजघाट श्मशान घाट पर रविवार की सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। यहां सुबह करीब 11:30 बजे बारिश के दौरान लाल पत्थर का गुंबद अचानक भरभराकर गिर गया। गुंबद के नीचे बैठे शाहपुर के शक्तिनगर के रहने वाले संजय सिंह और आलोक अस्थाना मलबे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद घाट पर अफरातफरी मच गई। दोनों घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भेजा गया। जहां थोड़ी देर बाद अधिवक्ता आलोक अस्थाना की मौत हो गई।
हादसे के समय घाट पर 50 से अधिक लोगों के मौजूद होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों की मदद से मलबा हटाकर घायलों को बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही पुलिस बल के साथ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। हादसा स्थल पर मौजूद नगर निगम के स्वच्छता कर्मियों ने बताया कि घटना के समय वे गुंबद से कुछ दूरी पर थे। उस समय तेज बारिश के साथ बिजली कड़कने की आवाज भी आ रही थी। कर्मचारियों ने आशंका जताई कि संभवत: बिजली गिरने के कारण गुंबद क्षतिग्रस्त होकर गिरा होगा।
हालांकि हादसे का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। चौकी प्रभारी रोहित साहू ने दोनों घायलों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचाया। सीओ कोतवाली ओंकार दत्त ने बताया कि सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस बल भेजा गया था। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर राहत-बचाव कार्य के साथ हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं।
हादसे के दौरान गोरखपुर के राप्तीनगर के रहने वाले आलोक भी वहीं गुंबद के नीचे बैठे थे। वह अपनी मामी के अंतिम संस्कार में शामिल होने घाट पहुंचे थे। हादसे से ठीक पहले एक कुत्ता आकर उनके पास बैठ गया। उसे भगाने के लिए वह उठे और दौड़े, जिससे उनकी जगह बदल गई। इसी दौरान गुंबद ढहा। आलोक वहां होते थे तो वह भी इसकी चपेट में आ जाते लेकिन वह बाल बाल बच गए। आलोक ने कहा कि कुत्ते को भगाने न दौड़ा होता और इस वजह से मैं अपनी जगह से नहीं उठता तो मैं भी मलबे में दब जाता। यह घटना जीवन भर नहीं भूलूंगा।
साथी के घायल होने की सूचना पर जिला अस्पताल पहुंचे अधिवक्ताओं ने वहां की दुर्व्यवस्था को लेकर नारेबाजी की। घटना की सूचना पर डीएम दीपक मीणा, एसपी सिटी निमिष पाटिल, सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ कोतवाली मौके पर पहुंचे हैं। अधिवक्ताओं ने जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा एम्बुलेंस समय से उपलब्ध न कराने का भी आरोप लगाया। उन्होंने जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
वहीं नेपाल में बाढ़ की त्रासदी के बीच गोरखपुर में नदियों के जलस्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। हालांकि शनिवार की शाम सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक गोरखपुर जनपद में तुर्तीपार में सरयू, बर्डघाट में राप्ती और त्रिमुहानी घाट में रोहिन नदी के जलस्तर में फिलहाल खतरे की स्थिति नहीं है। हालांकि नदियों के जलस्तर पर निगरानी जारी है।
तुर्तीपार में सरयू नदी का जलस्तर 64.400 मीटर दर्ज हुआ, यहां खतरे का बिंदु 64.01 मीटर है। यानी जलस्तर खतरे के बिंदु से करीब 0.40 मीटर ऊपर है। पिछले 24 घंटे में यहां जलस्तर में करीब 0.04 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई। इसी तहर बर्डघाट में राप्ती नदी का जलस्तर 67.900 मीटर दर्ज हुआ। यहां खतरे का बिंदु 70.50 मीटर है। और नदी करीब 2.60 मीटर नीचे बह रही है। वहीं त्रिमुहानी घाट में रोहिन नदी का जलस्तर 79.680 मीटर रहा। खतरे का बिंदु 82.44 मीटर होने के कारण नदी करीब 2.76 मीटर नीचे है। प्रशासन और सिंचाई विभाग की ओर से नदियों के जलस्तर की निगरानी व तटवर्ती इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है।
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