बिहार के मुजफ्फरपुर में पैत्रिक संपत्ति के लालच में छोटे भाई ने अपने बड़े भाई और भाभी को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। दूसरे थाना इलाके में एक झाड़ी से दंपति के शव बरामद किए गए हैं। मृतकों की बेटी ने इस मामले में किडनैपिंग बताकर एफआईआर दर्ज कराई थी।
मुजफ्फरपुर पुलिस ने ब्रह्मपुरा से 22 मई की रात गायब हुए दंपती मनोज भगत (48) और मीनू देवी (45) की गुत्थी तीन महीने बाद सुलझ गई है। पुलिस ने बोचहां में दरभंगा फोरलेन किनारे मुरादपुर चौक के पास राधा स्वामी सत्संग आश्रम के पास झाड़ी से दोनों के कंकाल बरामद किए हैं।
दोनों के शव को बेडशीट व कंबल में लपेटकर फेंका गया था। इस मामले में पुलिस ने मृतक के छोटे भाई अविनाश कुमार उर्फ अनुज भगत को गिरफ्तार किया। उसने ही भाई व भाभी की हत्या की थी। पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल कर ली है।
मनोज भगत का ब्रह्मपुरा में बथुआ नर्सिंगहोम के सामने भगत मार्केट है। इसमें मनोज भगत की लैपटॉप की दुकान है। इसी मार्केट के ऊपर में उनका आवास है। एसडीपीओ नगर दो विनीता सिन्हा ने बताया कि शनिवार देर रात पुलिस ने अविनाश को गिरफ्तार किया। सख्ती से पूछताछ में उसने हत्या कर शव बोचहां में फेंकने की बात कबूल ली। उसकी निशानदेही पर पुलिस बोचहां पहुंची और झाड़ी से दो कंकाल बरामद किए।
दंपती के गायब होने के बाद उनकी इकलौती बेटी सेफाली ने 22 मई को ब्रह्मपुरा थाने में माता-पिता के अपहरण का केस दर्ज कराया था। शुरुआत में पुलिस ने अविनाश से पूछताछ की थी, लेकिन उसने पुलिस को गुमराह कर दिया। कहा कि वे लोग खुद लापता हुए हैं और उसे फंसाने की साजिश रची जा रही है। पुलिस ने उस वक्त पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया था। इसके बाद अविनाश अंडरग्राउंड हो गया था।
अपहरण के मामले की जांच के लिए जब बंद घर का ताला खोलकर पुलिस ने जांच की तो घर में कई जगह खून के छींटे मिले। इस पर बेटी सेफाली ने आशंका जताई थी कि उसके पिता की हत्या कर दी गई है। पुलिस ने मोहल्ले के सीसीटीवी खंगाले तो देर रात में अविनाश अपनी गाड़ी से निकलते हुए दिखा। पूछताछ में उसने कहा कि वह सैर पर गया था और कुछ देर बाद वापस आ गया।
मनोज भगत और मीनू देवी का शव बरामद होने के बाद भी गिरफ्तार छोटा भाई अविनाश भगत उर्फ अनुज पुलिस को पूरी कहानी बताने में भरमाता रहा। उसने पुलिस को बताया कि उसने अकेले ही दोनों की गला दबाकर हत्या की। जब पुलिस ने उससे पूछा कि गला दबाया तो घर में फर्श व छत पर खून कहां से आया, तो इस सवाल पर उसने चुप्पी साध ली।
पुलिस का कहना है कि अविनाश अकेले इस घटना को अंजाम नहीं दे सकता है। दो लोगों की हत्या करने के साथ ही ऊपरी मंजिल से शव को उतारकर कार में रखना, फिर बोचहां में ले जाकर झाड़ी में शव को ठिकाने लगाना अकेले का काम नहीं हो सकता। इसमें कम से कम चार लोग शामिल रहे होंगे। पुलिस को आशंका है कि अनुज ने पेशेवर हत्यारों को बुलाकर हत्या करवाई और शव को बोचहां में ठिकाने लगाया होगा। वह मामले को छिपा रहा है। अविनाश से पुलिस के एक्सपर्ट अधिकारियों ने भी पूछताछ की।
जिस प्लॉट में शव मिले, उसके मालिक ने पुलिस को बताया कि मई में जब शव फेंका गया था, उसी दौरान वहां दो मृत गाय को भी किसी ने लाकर फेंका था। गाय की सड़ांध में दोनों शवों की बदबू छिप गई, इसलिए किसी को पता नहीं चला। पुलिस को आशंका है कि गाय के शव भी अविनाश ने ही फिंकवाए होंगे, ताकि दुर्गंध से लोगों को शक न हो। पुलिस कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कार्रवाई में जुटी है।
हत्या के बाद अविनाश ने दोनों शवों को बेडशीट में लपेटा और अपनी गाड़ी में लादकर बोचहां ले गया। बोचहां में सत्संग आश्रम के पास दरभंगा फोरलेन किनारे झाड़ी में दोनों शवों को फेंक दिया। गाड़ी के फुटमैट पर खून गिर गया था तो सबूत मिटाने के लिए उसने उसे भी घटनास्थल पर ही फेंक दिया था।
पुलिस के अनुसार, छोटे भाई अविनाश का बड़े भाई से मार्केट की पैतृक जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद में 20 मई की रात अविनाश ने वारदात को अंजाम दिया। उसने पहले बड़े भाई को घर में ही मार दिया। यह देख उसकी भाभी छत पर भागी तो अविनाश ने छत पर जाकर उसकी भी हत्या कर दी।
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