सिक्किम के राज्यपाल नियुक्ति को लेकर विरोध का माहौल बना हुआ है। अंकिता भंडारी के माता‑पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना दिया, जबकि दुष्यंत गौतम को 2022 के हत्याकांड से जोड़ने वाले आरोपों की लहर चल रही है।
राष्ट्रपति ने 12 अक्टूबर 2026 को दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम के राज्यपाल नियुक्त किया। इस नियुक्ति पर उत्तराखंड की कांग्रेस ने उपवास का ऐलान किया और कई नेता दिल्ली में उनके साथ खड़े हुए।
अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी ने राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग की। राहुल गांधी ने उन्हें समर्थन का आश्वासन दिया और संपर्क के लिए अपना कार्यालय नंबर दिया।
मामले की शुरुआत 22 दिसंबर 2025 को हुई, जब पूर्व बीजेपी MLA सुरेश राठौर की पत्नी, अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने बताया कि उनके पास ‘गट्टू’ नामक एक VIP के बारे में जानकारी है, जिसे 2022 के हत्याकांड से जोड़ा जा रहा है। वीडियो में दुष्यंत गौतम का नाम भी आया।
23 दिसंबर को राठौर ने दावा किया कि वह वीडियो में इस्तेमाल हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग AI‑जनित है और उसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाया। इस पर विवाद दो ध्रुवों में बंट गया – उर्मिला का दावा कि रिकॉर्डिंग में महत्वपूर्ण साक्ष्य है, और राठौर का यह कहना कि यह नकली है।
दुष्यंत गौतम ने 5 जनवरी 2026 को देहरादून के डालनवाला थाने में शिकायत दर्ज करवाई और 7 जनवरी को दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का दीवानी मुकदमा दायर किया। उन्होंने उर्मिला, राठौर, कांग्रेस के संबंधित पदाधिकारियों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों के खिलाफ 2 करोड़ रुपये की हर्जाना राशि की मांग की।
कोर्ट ने प्रारंभिक रूप से मानहानि के दावे को स्वीकार किया और प्रतिवादियों को दुष्ट जानकारी वाले पोस्ट को हटाने और 24 घंटे के भीतर सामग्री हटाने का निर्देश दिया।
पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच की सिफारिश की। यह कदम विरोध प्रदर्शन और VIP की भूमिका को लेकर बढ़ते दबाव के बीच आया। अंकिता के माता‑पिता ने कहा कि जांच में VIP पहलू को विशेष रूप से शामिल किया जाना चाहिए। फरवरी में CBI ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया और उत्तराखंड पुलिस की SIT से दस्तावेज़ों की जांच शुरू की।
FIR में अज्ञात व्यक्ति का नाम होना दुष्यंत गौतम को आरोपी बनाता नहीं है, पर CBI की जांच आगे न बढ़ते देख उत्तराखंड में कई बार विरोध प्रदर्शन हुए।
दुष्यंत कुमार गौतम बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं, जिनका जन्म 29 दिसंबर 1957 को दिल्ली के मल्कागंज में हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए. किया और स्थानीय राजनीति से अपना करियर शुरू किया। 1997‑2002 तक वसंत विहार के नगर निगम पार्षद रहे, बाद में 2008 और 2013 में कोंडली विधानसभा क्षेत्र से दो बार चुनाव लड़े, पर जीत नहीं पाए। वे बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चे के प्रमुख और 2020 में राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त हुए। मार्च 2020 में हरियाणा से राज्यसभा सदस्य चुने गए और बाद में उत्तराखंड पार्टी प्रभारी बने। जुलाई 2024 में फिर से यह जिम्मेदारी मिली। फरवरी 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में करोल बाग से उन्होंने चुनाव लड़ा, पर आम आदमी पार्टी के रवि को हराए।
जनवरी 2026 में उन्होंने मानहानि के तहत 2 करोड़ रुपये के हर्जाने का मुकदमा दायर किया, जिस पर अदालत ने अंतरिम राहत दी। अक्टूबर 2026 में राष्ट्रपति भवन की घोषणा के बाद उन्हें सिक्किम के राज्यपाल नियुक्त किया गया, जिससे ही अंकिता भंडारी के परिवार ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
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