सोमवार की शाम MCX पर सोने‑चांदी के दामों में अचानक तेज गिरावट दर्ज की गई। सोने की कीमत 1 % से अधिक गिरकर 1,49,159 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुँच गई, जबकि चांदी 2,500 रुपये प्रति किलोग्राम घट कर 2,23,326 रुपये पर आ गई। यह गिरावट खरीदारों के लिए एक अस्थायी राहत का संकेत देती है, लेकिन इसके पीछे महंगाई और ब्याज दरों का दबाव छुपा है।
सत्र की शुरुआत में भी सोना घट रहा था, लेकिन देर शाम गिरावट तेज हो गई। सुबह सोने का भाव 1,50,056 रुपये था, जो पिछले सत्र में 1,51,499 रुपये पर बंद हुआ था। चांदी की कीमतें भी सुबह के समय लगभग 1,400 रुपये गिरकर 2,25,000 रुपये के आसपास थीं, लेकिन शाम तक 223,000 रुपये तक गिर गईं।
इन गिरावटों के पीछे देश‑विदेश में खुदरा महंगाई दर का लगातार बढ़ना प्रमुख कारण माना जा रहा है। सितंबर में रिटेल महंगाई 5.54 % पर पहुँची, जो 22 महीने के उच्चतम स्तर पर है; अगस्त में यह 4.82 % थी।
उच्च महंगाई के कारण RBI ब्याज दरों में कटौती टाल रहा है या उन्हें उच्च स्तर पर बनाए रख रहा है। इस माहौल में बॉन्ड यील्ड और बैंक डिपॉज़िट जैसे विकल्प अधिक आकर्षक हो जाते हैं, जिससे बिना ब्याज वाले सोने‑चांदी की मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बनता है।
चांदी की कीमत में गिरावट विशेष रूप से चौंकाने वाली रही। जनवरी में चांदी ने वायदा बाजार में 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड बना लिया था, लेकिन महंगाई, औद्योगिक मांग में सुस्ती और ऊँची ब्याज दरों के कारण लगातार बिकवाली जारी है। अब चांदी अपने ऑल‑टाइम हाई से लगभग 1.96 लाख रुपये सस्ती होकर 2,23,326 रुपये पर उपलब्ध है।
सोने की कीमतों में भी पिछले डेढ़ महीने में तीव्र उतार‑चढ़ाव देखा गया। 31 अगस्त को MCX पर 10 ग्राम सोने का भाव 1,55,484 रुपये था, जो 30 सितंबर तक 1,49,036 रुपये तक गिर गया। अक्टूबर की शुरुआत में त्योहारों से पहले थोड़ी सी उछाल देखी गई थी, लेकिन महंगाई के नए आंकड़ों ने फिर से 1.5 लाख रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ दिया।
रिटेल महंगाई के बढ़ने से आम उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति घटती है, जिससे दैनिक खर्चों का बजट बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप, सर्राफा बाजार में खुदरा मांग पर असर पड़ा है; त्योहारों और शादियों के सीजन में भी खरीदार कम मात्रा में या खरीदारी टाल रहे हैं। संस्थागत निवेशक भी महंगाई से बचने के लिए सुरक्षित संपत्तियों की बजाय डेट फंड्स और फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक रिटेल महंगाई नियंत्रण में नहीं आती और RBI ब्याज दरों में ढील देने का स्पष्ट संकेत नहीं देता, तब तक सोने‑चांदी की कीमतों में सीमित तेजी ही संभव है। खुदरा खरीदारों और दीर्घकालिक निवेशकों को इस गिरावट के दौरान किस्तों में खरीदारी करने की सलाह दी गई है।
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