यमन में हूती विद्रोहियों की ताकत बढ़ने के साथ, सरकार की रणनीति भी बदल रही है। अब वह खोए हुए इलाकों को फिर से जीतने की बजाय, मारिब जैसे बचे हुए गढ़ों को बचाने पर अधिक ध्यान दे रही है। मारिब यमन का प्रमुख तेल‑गैस केंद्र है और सरकार की आय का बड़ा स्रोत है।
सरकारी फौज अल‑मखा (मोखा) और ताइज के पश्चिम में खोए हुए क्षेत्रों को वापस लेने की बजाय, मारिब के रक्षा कार्य में जुटी है। वहीं हूती ताइज के साथ-साथ मारिब के बाहरी इलाकों में भी दबाव बढ़ा रहे हैं। इस बीच, सरकार सऊदी की हवाई हमलों पर बड़ी हद तक निर्भर है।
मारिब क्यों है इतना अहम? यह न केवल सरकार के नियंत्रण में है, बल्कि यहाँ देश का सबसे बड़ा घरेलू गैस भंडार स्थित है। आर्थिक रूप से मारिब का नुकसान सरकार की रीढ़ को झटका दे सकता है। भौगोलिक रूप से भी यह रणनीतिक है—राजधानी सना से लगभग 120 किमी और सऊदी सीमा से लगभग 340 किमी दूर, अल‑जौफ, हद्रामौत, शब्वा और अल‑बैदा जैसे इलाकों के पास स्थित है। मारिब सऊदी‑अल‑वद्यिया बॉर्डर क्रॉसिंग की प्रमुख सड़क पर स्थित है, जो पूर्वी मारिब के तेल क्षेत्रों से जुड़ी है।
हूती के लिए मारिब पर कब्जा सऊदी सीमा के करीब पहुंचने और उत्तरी यमन में सैन्य पकड़ मजबूत करने का अवसर बनाता है। वर्तमान में मारिब शहर और उसके पूर्वी‑मध्य हिस्से सरकार के नियंत्रण में हैं, जिन्हें उत्तरी यमन में आखिरी बड़ा गढ़ माना जाता है।
हूती मारिब के पीछे क्यों पड़े हैं? मारिब में 2 मिलियन से अधिक बेघर लोग, एक बड़ा आर्मी बेस, तेल‑गैस फील्ड और एक महत्वपूर्ण पावर स्टेशन हैं। हूती ने कई बार शहर पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन पिछले हमले नाकाम रहे। यमन की मीडिया के अनुसार, हूती ने मारिब प्रांत में बड़ी संख्या में लड़ाके और मिलिट्री उपकरण भेजे हैं, जिससे नया हमला संभव हो रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिमी तट पर हूती की बढ़त के बाद, उन्होंने लाल सागर के बंदरगाह मोखा पर कब्जा करने और बाब‑अल‑मंदाब की ओर बढ़ने की योजना बनाई है। यमन सेना ने कहा, "हमें पता था कि मारिब उनका अगला बड़ा लक्ष्य बन सकता है।"
कई मोर्चों पर दबाव एक साथ बढ़ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में पश्चिमी तट, मोखा, होदेदा, अल‑जौफ, धालेआ और मारिब में सैकड़ों लोगों की मौत और 880 से अधिक घायल हुए हैं। तटीय इलाकों में बढ़त के बाद हूती ने लाहज और मारिब की ओर भी रुख किया है, और रिपोर्ट्स में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) से हथियार और रणनीतिक समर्थन के दावे भी सामने आए हैं।
यदि मारिब हूती के हाथों पड़ता है, तो उनका कई लाभ होगा: सरकार के तेल‑गैस आय पर सीधा असर, सऊदी सीमा के करीब रणनीतिक बढ़त, और उत्तरी यमन में उनका नियंत्रण मजबूत होगा। साथ ही लाल सागर के प्रमुख शिपिंग रूट पर दबाव बढ़ेगा, जिससे सऊदी अरब और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं उत्पन्न होंगी।
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